रायपुर/जगदलपुर। सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और सघन ऑपरेशनों के बीच माओवादी संगठन को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। संगठन के पोलित ब्यूरो मेंबर और केंद्रीय समिति के वरिष्ठ सदस्य देवजी ने 18 अन्य माओवादियों के साथ तेलंगाना में आत्मसमर्पण कर दिया है। देवजी को वर्तमान में संगठन का सबसे बड़ा कमांडर माना जाता था। उनके इस कदम से माओवादी नेटवर्क की रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक कमर टूटती नजर आ रही है।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बसव राजू के न्यूट्रलाइज होने के बाद देवजी ही सबसे बड़ा नक्सली कमांडर बचा था। उन्होंने बताया कि देवजी के आत्मसमर्पण की सूचना प्राप्त हुई है। गृह मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि संगठन में जो अन्य बड़े नाम अब भी सक्रिय या निष्क्रिय हैं, उन्हें भी मुख्यधारा में लाने का प्रयास जारी है। सरकार आत्मसमर्पण करने वालों के लिए बैंक राशि, विवाह और खेती जैसी पुनर्वास व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर रही है।
पिछले कुछ महीनों में शीर्ष माओवादी नेतृत्व के आत्मसमर्पण का सिलसिला तेज हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, 13 सितंबर 2025 को सुजाता उर्फ कल्पना ने हैदराबाद में, 14 अक्टूबर 2025 को मल्लोजुला वेणुगोपाल राव ने महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में और 17 अक्टूबर 2025 को सतीश उर्फ रूपेश ने जगदलपुर में सरेंडर किया था। इसी कड़ी में दिसंबर 2025 में रामदर मज्जी ने राजनांदगांव में आत्मसमर्पण किया था। अब 22 फरवरी 2026 को देवजी का आत्मसमर्पण संगठन के लिए सबसे बड़ी क्षति माना जा रहा है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती घेराबंदी और संगठन के भीतर पनपती हताशा के कारण बड़े कमांडर अब हिंसा का रास्ता छोड़ रहे हैं। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां इसे बस्तर और पड़ोसी राज्यों में माओवाद के खात्मे की दिशा में एक निर्णायक मोड़ मान रही हैं।