बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, मनी लॉन्ड्रिंग के शिकंजे में फंसे एसडीपीओ, अब ईडी करेगी 80 करोड़ की संपत्ति की जांच

पटना। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। इस बार किशनगंज के एसडीपीओ गौतम कुमार जांच के घेरे में आए हैं। उन पर 80 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। पुलिस मुख्यालय ने कार्रवाई करते हुए उन्हें पद से हटा दिया है और मुख्यालय अटैच कर दिया है। माना जा रहा है कि जल्द ही उनके निलंबन की प्रक्रिया भी पूरी कर ली जाएगी।

प्रेमिका और रिश्तेदारों के नाम पर किया निवेश दरअसल, 1994 बैच के दारोगा से एसडीपीओ के पद तक पहुंचे गौतम कुमार ने काली कमाई को छुपाने के लिए कई शातिर तरीके अपनाए। जांच में यह बात सामने आई है कि उन्होंने अपने नाम पर कोई भी संपत्ति नहीं खरीदी। पूर्णिया में मिले 16 प्लॉटों में से सात उनकी महिला मित्र, चार पत्नी, तीन सास और एक उनके बेटे के नाम पर पंजीकृत हैं। इसके अलावा उनकी महिला मित्र के बैंक खातों में करोड़ों का लेनदेन पाया गया है। गौतम कुमार ने न केवल महिला मित्र के नाम पर जमीन खरीदी, बल्कि ट्रक और महंगे गहनों में भी भारी निवेश किया है। पटना, नोएडा और गुरुग्राम में भी उनके आलीशान फ्लैट्स का पता चला है।

सिलीगुड़ी के चाय बागान और विधायक कनेक्शन गौरतलब है कि इस मामले की जांच अब राजनीतिक गलियारों तक भी पहुंच गई है। जांच एजेंसियों को गौतम कुमार और पूर्णिया के एक विधायक के बीच करीबी रिश्तों के सबूत मिले हैं। मैदानी सूत्रों के अनुसार, इन दोनों ने मिलकर पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में एक चाय बागान खरीदा है। इसके अलावा नोएडा और गुरुग्राम के रियल एस्टेट कारोबार में भी बड़े निवेश की आशंका जताई जा रही है, जिसकी कड़ियां अब ईओयू जोड़ रही है।

रडार पर डीआरडीए निदेशक वैभव कुमार भ्रष्टाचार के इस मामले में केवल पुलिस विभाग ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारी भी निशाने पर हैं। सहरसा के डीआरडीए निदेशक वैभव कुमार की संपत्तियों ने भी सबको चौंका दिया है। महज 12-13 साल की नौकरी में उन्होंने पटना और मुजफ्फरपुर में 16 प्लॉट खरीदे हैं, जिनकी बाजार दर सरकारी कीमत से कहीं ज्यादा है। वैभव ने अपने नाबालिग बेटे के नाम पर मुजफ्फरपुर में एक आईटीआई कॉलेज भी शुरू किया है। इस मामले में ग्रामीण विकास विभाग से उनकी पुरानी योजनाओं का पूरा रिकॉर्ड मांगा गया है।

जब्ती और निलंबन की तैयारी बता दें कि दोनों अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर की कॉपी संबंधित विभागों को सौंप दी गई है। गौतम कुमार की जगह मंगलेश कुमार को किशनगंज का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। आने वाले समय में आर्थिक अपराध इकाई और ईडी मिलकर इन बेनामी संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू करेगी।

Related News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *