छत्तीसगढ़ के नाम बड़ी उपलब्धि: अशोक तिवारी को मिली नेशनल टैगोर फैलोशिप, राज्य से चुने जाने वाले बने पहले एक्सपर्ट

रायपुर। छत्तीसगढ़ की कला और संस्कृति के लिए एक बहुत ही गर्व की बात सामने आई है। प्रदेश के जाने-माने संस्कृति और संग्रहालय विशेषज्ञ अशोक तिवारी को भारत सरकार की सबसे प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रीय टैगोर शोधवृत्ति’ (National Tagore Fellowship) के लिए चुना गया है। खास बात यह है कि अशोक तिवारी छत्तीसगढ़ के पहले ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हें इस बड़े सम्मान और रिसर्च के लिए चुना गया है।

किस विषय पर होगा शोध? अशोक तिवारी को यह फैलोशिप छत्तीसगढ़ की लोक और जनजातीय चित्रकला और मूर्तिकला पर गहराई से रिसर्च करने के लिए दी गई है। उनके रिसर्च का विषय “Sacred and Decorative: Painted and Sculpted Folk and Tribal Arts of Chhattisgarh” रखा गया है। अगले दो सालों तक वे इस प्रोजेक्ट पर काम करेंगे और छत्तीसगढ़ की कला को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाने का प्रयास करेंगे।

संस्कृति के क्षेत्र में 50 साल का अनुभव अशोक तिवारी पिछले पांच दशकों (50 साल) से भी ज्यादा समय से संस्कृति और कला के क्षेत्र में रचे-बसे हुए हैं। उन्होंने भोपाल स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में लगभग 30 सालों तक अपनी सेवाएं दी हैं और उस संस्थान को संवारने में बड़ी भूमिका निभाई है। वर्तमान में वे सी.वी. रमन यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के तौर पर काम कर रहे हैं।

‘गढ़कलेवा’ और ‘आमचो बस्तर’ के पीछे था इनका दिमाग छत्तीसगढ़ के लोगों के बीच मशहूर पारंपरिक खानपान केंद्र ‘गढ़कलेवा’ की जो परिकल्पना हम देखते हैं, उसे जमीन पर उतारने वाले मुख्य क्यूरेटर अशोक तिवारी ही रहे हैं। इसके अलावा, रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में पहली मुक्ताकाश प्रदर्शनी ‘आमचो बस्तर’ का क्यूरेशन भी उन्हीं की देखरेख में हुआ था।

प्रवासी छत्तीसगढ़ियों पर भी कर चुके हैं बड़ा काम पिछले 8 सालों से अशोक तिवारी देश ही नहीं बल्कि विदेशों में रहने वाले छत्तीसगढ़ी समाज पर लगातार रिसर्च कर रहे हैं। इस विषय पर उनकी अब तक चार किताबें भी छप चुकी हैं। संस्कृति और कला जगत के जानकारों का कहना है कि इस फैलोशिप के लिए उनका चुना जाना छत्तीसगढ़ के लिए किसी बड़े पुरस्कार से कम नहीं है।

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