राजकुमार मल
बलौदाबाजार-भाटापारा-रिकॉर्ड 800 रुपए का हाई जंप लगाने के बाद अब 4000 रुपए प्रति टन पर जा पहुंचा है धान भूंसा। 300 से 400 रुपए क्विंटल की छलांग कोढ़ा ने भी लगा ली है। इसमें नई कीमत 900 से 1000 रुपए क्विंटल बोली जा रही है।
धान भूंसा का हाई जंप अब ईंट भट्ठा संचालकों की बड़ी परेशानी बन रहा है, तो भूंसा आधारित उद्योगों को विवशता में कोयला या लकड़ी की खरीदी करनी पड़ रही है। मजबूर हैं राईस ब्राॅन ऑयल बनाने वाली यूनिटें और डेयरियां कोढ़े में आई तेजी के साथ शॉर्टेज जैसी स्थिति का सामना करने के लिए। ऐसे में तय माना जा रहा है तैयार उत्पादनों की कीमत में वृद्धि को।

इसलिए भूंसा और कोढ़ा का हाई जंप
कृषि उपज मंडियों में कमजोर आवक एक वजह तो है ही, इसके अलावा सघन जांच और सख्त कार्रवाइयों से भी राईस मिलों का पूरी क्षमता के साथ परिचालन बाधित है। इसलिए धान भूंसा और कोढ़ा की सप्लाई शॉर्ट हो चुकी है जबकि दोनों सामग्रियों की डिमांड बराबर बनी हुई है। यही वजह लगातार तेजी की स्थिति बना रही है धान भूंसा और कोढ़ा में।
जोर का झटका
था 3200 से 3300 रुपए टन। है 4000 से 4100 रुपए टन। धान भूंसा की कीमत में आई 800 रुपए की यह उछाल भूंसा आधारित उद्योगों एवं ईंट भट्ठा संचालकों के लिए झटके से कम नहीं मानी जा रही है क्योंकि तेजी के साथ मांग के अनुरूप धान भूंसा में आपूर्ति भी बेहद कमजोर है। यह स्थिति कम से कम एक पखवाड़े तक और बनी रहने की आशंका है।

परेशान हैं डेयरियां और तेल मिलें
पशु आहार बेचने वाली दुकानें और डेयरियां हताश हो चलीं हैं क्योंकि कोढ़ा में बढ़ती कीमत और कमजोर आपूर्ति दुग्ध उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहीं हैं। कीमत की बात करें तो 600 से 700 रुपए क्विंटल पर बिकने वाला कोढ़ा अब 300 रुपए की तेजी के बाद 1000 रुपए क्विंटल पर पहुंच गया है। तेज वृद्धि और कमजोर आपूर्ति खाद्य तेल उत्पादन करने वाली ऐसी इकाइयों पर भी गहरा असर डाल रही है, जो राईस ब्राॅन ऑयल बनातीं हैं।