Bhilai Export Tax Protest : भिलाई : रमेश गुप्ता : भिलाई नगर निगम द्वारा लगाए जा रहे “एक्सपोर्ट टैक्स” के विरोध में शहर के सभी प्रमुख औद्योगिक एवं व्यापारिक संगठन एकजुट हो गए हैं। भिलाई निर्यात कर संघर्ष समिति के बैनर तले स्टील चैंबर भिलाई, छत्तीसगढ़ वायर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, भिलाई वायर ड्राइंग संगठन, एनसिलरी संगठन, लघु उद्योग भारती और छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज़ ने इस टैक्स को अन्यायपूर्ण करार देते हुए अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
Bhilai Export Tax Protest : एक्सपोर्ट टैक्स पर प्रमुख आपत्तियां
आयोजित संयुक्त पत्रकार वार्ता के दौरान उद्योगपति संदीप अग्रवाल, राहुल बंसल और अरविंद खुराना ने बताया कि नगर निगम ने 2017 से बैक डेट में कर वसूली के नोटिस जारी किए हैं। इसमें 7-8 वर्षों का बकाया और भारी पेनल्टी जोड़ी गई है, जो न तो पारदर्शी है और न ही न्यायोचित। व्यापारियों व लघु उद्योगों को बिना किसी पूर्व सूचना या सुनवाई के अवसर के सीधे नोटिस भेजे जा रहे हैं।
समानता के सिद्धांत का उल्लंघन
उद्योगपतियों का कहना है कि पूरे छत्तीसगढ़ के किसी भी अन्य नगर निगम में ऐसा कर लागू नहीं है, जिससे भिलाई के उद्योगों पर भेदभावपूर्ण बोझ पड़ रहा है। एक्सपोर्ट टैक्स एक अप्रत्यक्ष कर है, जिसे अंत में ग्राहक को वहन करना होता है। यदि निगम ने समय पर सूचना दी होती, तो उद्योग इसे बिल में जोड़कर वसूल लेते। अब गत वर्षों के लिए इसे वसूलना असंभव है।
GST की मूल भावना के विपरीत
देश में “वन नेशन, वन टैक्स” की व्यवस्था लागू होने के बाद एंट्री टैक्स और ऑक्ट्रॉय जैसे स्थानीय कर समाप्त कर दिए गए थे। ऐसे में निर्यात पर कर लगाना केंद्र सरकार की निर्यात प्रोत्साहन नीति और जीएसटी व्यवस्था का उल्लंघन है। निगम के पास इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) जैसी कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे यह कर सीधा लागत बढ़ाता है।
रोजगार और प्रतिस्पर्धा पर असर
भिलाई की MSME इकाइयां पहले से ही मंदी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा (विशेषकर चीन) की मार झेल रही हैं। 7-8 साल का एकमुश्त टैक्स और पेनल्टी वसूलने से कई इकाइयां बंद हो सकती हैं। इससे 40,000 से अधिक कर्मचारियों और उनके परिवारों की आजीविका पर संकट आ जाएगा, जिससे सरकार को जीएसटी राजस्व का भी भारी नुकसान होगा।
RTI और जनप्रतिनिधियों का रुख
संघर्ष समिति ने RTI के माध्यम से सात जानकारियां मांगी थीं, लेकिन एक माह बाद भी केवल तीन का जवाब मिला। पारदर्शिता के इस अभाव पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं। समिति के पदाधिकारियों ने सांसद विजय बघेल से मुलाकात की, जिन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह टैक्स गलत है और नहीं लगना चाहिए।
समिति की प्रमुख मांगें:
कर की वसूली तत्काल प्रभाव से रोकी जाए।
यदि कर आवश्यक है, तो इसे समूचे राज्य में समान रूप से लागू किया जाए।
“एक्सपोर्ट टैक्स” को जीएसटी ढांचे से बाहर न रखा जाए।
उद्योग संगठनों के साथ औपचारिक परामर्श के बाद ही निर्णय लिया जाए।
इस विषय को जीएसटी की राष्ट्रीय कमेटी की मासिक मीटिंग में चर्चा हेतु रखा जाए।
चेतावनी
संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि कर वसूली का दबाव और कुर्की की धमकी जारी रही, तो भिलाई के सभी उद्योग संयुक्त रूप से प्रतिष्ठान बंद कर जिला प्रशासन को चाबी सौंप देंगे। यह कदम प्रधानमंत्री के “5 ट्रिलियन इकोनॉमी” और “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” के विजन के विपरीत है। पत्रकार वार्ता में विष्णु अग्रवाल, पुरुषोत्तम अग्रवाल, अतुल गर्ग सहित बड़ी संख्या में उद्योगपति उपस्थित थे।