राजकुमार मल
भाटापारा। सौगात, अधूरा स्टेडियम, अहाता विहीन पशु आश्रय स्थल, बस स्टैंड, जहां-तहां लगते सब्जी बाजार और अधूरी नल-जल योजना। साथ में शाश्वत सफाई व्यवस्था। यह सब नई शहर सरकार को विरासत में मिलने वाली है।
यकीन मानिए, नई सरकार को विरासत के रूप में कई ऐसी समस्याएं मिलेंगी, जिनको खत्म करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना होगा। सफलता तो मिलेगी लेकिन सामूहिक जिम्मेदारी लेनी होगी पक्ष और विपक्ष को। तब ही भरोसा जीत पाएंगे शहर का और समस्या मुक्त शहर की कल्पना पूरी की जा सकेगी।
समस्या अनेक, अवसर एक
खेल प्रेमियों को आस है सर्व सुविधा युक्त स्टेडियम निर्माण की, जो अधूरा है। कई सरकारें आई और गईं लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिले। गर्मी, बारिश और शीत ऋतु में आसरा खोजते मवेशी सड़कों पर ही विचरण के लिए विवश हैं क्योंकि अहाता और भोजन व पानी की सुविधा नहीं है निर्धारित जगह पर। आगत नई शहर सरकार को पहली चुनौती पेय जल की समस्या से मिलने जा रही है। लगभग पूरा शहर पूरे साल सामना करता रहा है इस समस्या से।
नजर अंदाज करना भारी भूल होगी
रविवार और बुधवार ही नहीं, अब मंगलवार और शनिवार को भी लगने लगा है सब्जी बाजार। मुख्य मार्ग पर लग रहे यह दोनों, आवाजाही को बाधित कर रहे हैं। पूरे जिले का सबसे बड़ा यह शहर, सबसे ज्यादा अतिक्रमण वाला भी माना जा रहा है। समानांतर में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक उदासीनता भी बढ़ी हुई है। ऐसे में देखना होगा, नई शहर सरकार को कि कैसे स्थाई हो चुकी, इस समस्या का निदान किया जा सके?
गंभीर प्रयास जरूरी
बस स्टैंड और गार्डन। हालत पर चिंता जता रहे है शहरवासी। नई शहर सरकार को गंभीर पहल करनी होगी इन दोनों के लिए क्योंकि समय रहते कोशिश नहीं कि तो लचर सफाई व्यवस्था की तरह यह दोनों भी स्थायी समस्या बन सकते हैं। सबसे ज्यादा अहम है पक्ष और विपक्ष के बीच सहमति बनाना, तब ही कहीं जाकर सफलता मिलेगी।