नेपाल में ‘बालेन युग’ की शुरुआत, पूर्व पीएम ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक गिरफ्तार

Nepal Politics : काठमांडू: नेपाल की सत्ता संभालते ही प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन) ने कड़ा रुख अपना लिया है। शुक्रवार को हुई पहली कैबिनेट बैठक के चंद घंटों बाद ही नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को गिरफ्तार कर लिया गया। यह कार्रवाई पिछले साल हुए ऐतिहासिक ‘जेनरेशन जेड’ (Gen-Z) आंदोलन के दौरान लापरवाही बरतने और दमनकारी नीतियों के आरोपों के तहत की गई है।

पहली कैबिनेट मीटिंग में बड़ा फैसला प्रधानमंत्री बालेन शाह की अध्यक्षता में हुई पहली बैठक में ‘जेन-जी’ आंदोलन की उच्च स्तरीय जांच आयोग की रिपोर्ट को तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्णय लिया गया। सरकार के प्रवक्ता और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री सस्मित पोखरेल ने बताया कि आयोग ने केपी ओली और रमेश लेखक सहित कई शीर्ष अधिकारियों को दोषी पाया है। इन पर आरोप है कि उच्च पदों पर रहते हुए इन्होंने आंदोलन को संभालने में गंभीर कोताही बरती, जिसके लिए इन्हें अधिकतम 10 साल तक की कैद हो सकती है।

प्रतिशोध या न्याय? ओली ने दी चुनौती अपनी गिरफ्तारी के बाद केपी शर्मा ओली ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई उन्हें निशाना बनाने के लिए की गई है और वह इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। वहीं, जांच आयोग ने तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक चंद्र कुबेर खापुंग समेत कई अन्य बड़े अधिकारियों पर भी गाज गिराने की सिफारिश की है।

क्या था ‘जेन-जी’ आंदोलन? साल 2025 में नेपाल के युवाओं ने बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और पुरानी राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ सड़कों पर उतरकर मोर्चा खोल दिया था। इस विद्रोह को ‘जेनरेशन जेड’ आंदोलन का नाम दिया गया। युवाओं के इस भारी दबाव के कारण तत्कालीन ओली सरकार को इस्तीफा देना पड़ा था और संसद भंग कर दी गई थी। अब बालेन शाह की नई सरकार, जिसमें 15 में से 9 मंत्री युवा हैं, इस आंदोलन के दौरान हुई ज्यादतियों का हिसाब चुकता करने में जुट गई है।

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