नई दिल्ली। देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। निर्वाचन आयोग की घोषणा के मुताबिक, आगामी 16 मार्च को इन सीटों के लिए मतदान होगा। भारतीय संसद के इस ‘उच्च सदन’ में होने वाला यह चुनाव आम चुनावों (लोकसभा या विधानसभा) से पूरी तरह अलग होता है। जहां आम जनता सीधे वोट नहीं देती, बल्कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि (विधायक) सांसदों का चुनाव करते हैं।
इस बार जिन प्रमुख राज्यों में चुनाव होने हैं, उनमें महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, असम और छत्तीसगढ़ (दो सीटें) शामिल हैं। राज्यसभा में हर दो साल में एक तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं और प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल 6 साल का होता है।
कैसे चुने जाते हैं राज्यसभा सदस्य?
राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया ‘अप्रत्यक्ष निर्वाचन’ पद्धति पर आधारित है। इसमें केवल राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित विधायक (MLA) ही मतदान कर सकते हैं। विधान परिषद के सदस्यों को इसमें वोट डालने का अधिकार नहीं होता। उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 30 वर्ष होनी चाहिए।
क्या है जीत का ‘मैजिकल नंबर’ और फॉर्मूला?
राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए एक विशिष्ट गणितीय फॉर्मूले का उपयोग किया जाता है, जिसे ‘एकल संक्रमणीय मत पद्धति’ कहा जाता है। किसी उम्मीदवार को जीतने के लिए कितने वोटों की आवश्यकता होगी, इसका निर्धारण इस प्रकार होता है:
जीत का फॉर्मूला:
$[ \frac{(\text{कुल विधायकों की संख्या} \times 100)}{(\text{राज्य की खाली सीटें} + 1)} ] + 1$
सरल भाषा में कहें तो, विधानसभा के कुल विधायकों की संख्या को 100 से गुणा किया जाता है, फिर उसमें खाली सीटों की संख्या में 1 जोड़कर भाग दिया जाता है। अंत में जो परिणाम आता है, उसमें फिर से 1 जोड़ दिया जाता है। जो संख्या निकलती है, उतने ‘वैल्यू’ के वोट उम्मीदवार को जीतने के लिए चाहिए होते हैं।
वरीयता (Preference) का खेल
राज्यसभा में वोटिंग के दौरान विधायक अपनी पसंद के उम्मीदवारों को वरीयता (1, 2, 3…) देते हैं। यदि पहली वरीयता के वोटों से कोई फैसला नहीं होता, तो दूसरी और तीसरी वरीयता के वोटों की गिनती की जाती है।
छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों की स्थिति
16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा और उसी दिन शाम 5 बजे से मतों की गिनती शुरू हो जाएगी। छत्तीसगढ़ की 2 सीटों के साथ-साथ महाराष्ट्र की 7, पश्चिम बंगाल की 5 और बिहार की 5 सीटों पर सबकी नजरें टिकी हैं। राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी गोटियां सेट करना शुरू कर दिया है, क्योंकि राज्यसभा में बहुमत होना केंद्र सरकार के लिए किसी भी विधेयक को पारित कराने हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।