रायपुर। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित पद्म पुरस्कारों की सूची में छत्तीसगढ़ की तीन विभूतियों का नाम शामिल होना राज्य के लिए गौरव का विषय है। खास बात यह है कि सम्मानित सभी व्यक्तित्व वर्षों से बस्तर अंचल के दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सेवा कार्य कर रहे हैं।
बस्तर की ‘बड़ी दीदी’ बुधरी ताती को पद्मश्री
दंतेवाड़ा जिले के हीरानार गांव की निवासी बुधरी ताती को महिला सशक्तिकरण, आदिवासी उत्थान और समाजसेवा के लिए पद्मश्री सम्मान दिया जाएगा। वर्ष 1984 से वे निरंतर वनांचल क्षेत्रों में नशामुक्ति अभियान, साक्षरता, सामाजिक जागरूकता और महिलाओं व बालिकाओं की शिक्षा के लिए कार्य कर रही हैं। अब तक वे 500 से अधिक महिलाओं को आत्मनिर्भर बना चुकी हैं। उनके सेवा भाव और स्नेह के कारण लोग उन्हें सम्मान से ‘बड़ी दीदी’ कहते हैं।
दुर्गम इलाकों में निःशुल्क इलाज देने वाले गोडबोले दंपत्ति सम्मानित
चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. रामचंद्र त्रयम्बक गोडबोले और उनकी पत्नी सुनीता गोडबोले को संयुक्त रूप से पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा। दोनों पिछले 37 वर्षों से बस्तर और अबूझमाड़ जैसे अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में निःशुल्क चिकित्सा सेवा दे रहे हैं।
उन्होंने ‘ट्रस्ट फॉर हेल्थ’ के माध्यम से उन गांवों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाईं, जहां सड़क, बिजली और मोबाइल नेटवर्क जैसी सुविधाएं भी नहीं हैं। सीमित संसाधनों के सहारे वे स्वयं पहुंचकर नियमित स्वास्थ्य शिविर लगाते हैं और मरीजों का उपचार करते हैं।
छत्तीसगढ़ की इन विभूतियों का पद्मश्री के लिए चयन राज्य की सेवा भावना और सामाजिक समर्पण को राष्ट्रीय पहचान दिलाता है। यह सम्मान न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे बस्तर अंचल और छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है।