नई दिल्ली। देश के साढ़े 8 करोड़ लोगों के लिए बड़ी खबर है जो बुढ़ापे के सहारे के तौर पर ‘अटल पेंशन योजना’ (APY) पर भरोसा जताए हुए हैं। पिछले कुछ समय से इस योजना के तहत मिलने वाली पेंशन राशि को बढ़ाए जाने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन सरकार ने फिलहाल इस पर अपनी स्थिति साफ कर दी है। सरकार का कहना है कि पेंशन की रकम बढ़ाने से लोगों की जेब पर बोझ बढ़ सकता है।
पेंशन राशि बढ़ाने से सरकार का इनकार
अटल पेंशन योजना के सब्सक्राइबर्स लंबे समय से मांग कर रहे थे कि महंगाई को देखते हुए 5,000 रुपये की अधिकतम पेंशन सीमा को बढ़ाया जाए। हालांकि, सरकार ने फिलहाल पेंशन राशि बढ़ाने की किसी भी संभावना से इनकार कर दिया है। सरकार के मुताबिक, यदि पेंशन की राशि बढ़ाई जाती है, तो हर महीने जमा किए जाने वाले ‘कंट्रीब्यूशन’ (मासिक योगदान) की रकम भी बढ़ जाएगी। इससे उन गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा, जिनके लिए यह योजना शुरू की गई थी।
2031 तक बढ़ी योजना की समय-सीमा
एक महत्वपूर्ण अपडेट यह भी है कि सरकार ने अटल पेंशन योजना की अवधि को साल 2030-31 तक के लिए बढ़ा दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले बजट में सरकार पेंशन राशि को लेकर जनता के भारी दबाव के बीच कोई नया रास्ता निकालती है या नहीं। फिलहाल सब्सक्राइबर्स को पुरानी स्लैब के हिसाब से ही निवेश और लाभ मिलेगा।
क्या है अटल पेंशन योजना और इसके आंकड़े?
मई 2015 में शुरू हुई इस योजना का मकसद असंगठित क्षेत्र के मजदूरों और गरीबों को सामाजिक सुरक्षा देना था।
- पेंशन स्लैब: योजना के तहत 1,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक की गारंटीड मासिक पेंशन मिलती है।
- योगदान: उम्र और चुनी गई पेंशन के आधार पर निवेशक को हर महीने 42 रुपये से लेकर 1,454 रुपये तक जमा करने होते हैं।
- सब्सक्राइबर्स की संख्या: सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 30 नवंबर 2025 तक 8.45 करोड़ से ज्यादा लोग इस योजना से जुड़ चुके हैं।
कौन से स्लैब में हैं सबसे ज्यादा लोग?
हैरानी की बात यह है कि कुल सब्सक्राइबर्स में से लगभग 86.91 प्रतिशत लोग अभी भी 1,000 रुपये वाली न्यूनतम पेंशन स्लैब में ही निवेश कर रहे हैं। वहीं, सिर्फ 8.15 प्रतिशत लोगों ने ही 5,000 रुपये वाली अधिकतम पेंशन स्लैब को चुना है। सरकार का मुख्य ध्यान अभी भी इसी बात पर है कि असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को बुढ़ापे में एक तय और भरोसेमंद आमदनी मिलती रहे।