नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट के तनाव और रसोई गैस (LPG) की संभावित किल्लत की खबरों ने घरेलू बजट का समीकरण बिगाड़ दिया है। बाजार में इन दिनों बिजली से चलने वाले चूल्हों (Induction Cooktops) की मांग में जबरदस्त उछाल आया है। आलम यह है कि कई बड़े शहरों में इंडक्शन स्टॉक से बाहर (Out of Stock) हो गए हैं। लेकिन क्या वाकई इंडक्शन पर खाना पकाना गैस के मुकाबले सस्ता पड़ता है? आइए समझते हैं इसके पीछे का सटीक आर्थिक गणित।
क्यों हो रही है इंडक्शन की लूट?
वैश्विक तनाव के कारण कच्चे तेल और गैस की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। हालांकि सरकार ने पर्याप्त स्टॉक होने और पैनिक न करने की अपील की है, फिर भी लोग भविष्य की सुरक्षा के लिए इंडक्शन को एक भरोसेमंद विकल्प मान रहे हैं। दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों के शोरूम्स में इंडक्शन खरीदने वालों की कतारें लगी हुई हैं।
बचत का गणित: गैस बनाम बिजली
आंकड़ों के लिहाज से देखें तो इंडक्शन पर खाना बनाना गैस सिलेंडर के मुकाबले काफी किफायती साबित हो रहा है:
गर्मी की बर्बादी (Efficiency): गैस स्टोव पर खाना पकाते समय लगभग 60% गर्मी बर्तन के आसपास की हवा में बर्बाद हो जाती है। इसके विपरीत, इंडक्शन की आधुनिक ‘इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तकनीक’ सीधे बर्तन को गर्म करती है, जिससे ऊर्जा की बर्बादी न के बराबर होती है। इसकी कार्यक्षमता 90% तक होती है।
खर्च की तुलना: दिल्ली में एक बिना सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत ₹913 के करीब है। वहीं, एक सिलेंडर के बराबर खाना पकाने में इंडक्शन लगभग 78 यूनिट बिजली की खपत करता है। ₹8 प्रति यूनिट की औसत दर से महीने भर का खर्च मात्र ₹624 आता है।
सीधी बचत: इस तुलना के आधार पर एक सामान्य परिवार हर महीने लगभग ₹300 की बचत कर सकता है।
क्या है शुरुआती निवेश?
इंडक्शन अपनाना दीर्घकालिक बचत है, लेकिन शुरुआत में आपको एक अच्छी गुणवत्ता वाले इंडक्शन चूल्हे के लिए ₹2,000 से ₹4,000 तक खर्च करने होंगे। साथ ही, इसके लिए फ्लैट बॉटम वाले लोहे या स्टील के विशेष बर्तनों की आवश्यकता होती है। अच्छी बात यह है कि यह शुरुआती निवेश साल भर की बचत से आसानी से कवर हो जाता है।
होटल और रेस्टोरेंट के लिए चुनौतियां
घरेलू रसोई के लिए इंडक्शन सस्ता तो है, लेकिन व्यावसायिक स्तर पर इसे अपनाना कठिन है। रेस्टोरेंट्स में बिजली का लोड अचानक बढ़ाना काफी महंगा पड़ता है और कमर्शियल इंडक्शन सेटअप लगाने का खर्च लाखों में आता है। इसीलिए बड़े होटलों में अब भी एलपीजी को ही प्राथमिकता दी जाती है।