डिजीटल सुनामी के बीच प्रिंट मीडिया: देश के ख्यातिनाम पत्रकार प्रकाश दुबे रायपुर में

रायपुर। छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता पर आधारित पत्रकार तृप्ति सोनी की पुस्तक 'छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता:चार पीढ़ियों की स्याही की विरासत' का विमोचन करते हुए देश के वरिष्ठ पत्रकार और भास्कर समूह के संपादक प्रकाश दुबे ने AI के खतरों की ओर आगाह किया। उन्होनें नये पत्रकारों से स्वंय का विवेक अनुभव और ग्राउंड रिपोर्टिंग पर ज्यादा भरोसा करने और संवेदनशीलता के साथ जनता के पक्ष में पत्रकारिता की बात कही। उन्होनें छत्तीसगढ़ की चार पीढ़ियों के पत्रकारों का हवाला देते हुए उनसे जुड़े अनुभव भी साझा किये।

कार्यक्रम के दौरान प्रकाश दुबे ने ‘डिजिटल सुनामी के बीच प्रिंट’ विषय पर व्याख्यान देते हुए मीडिया के बदलते परिदृश्य पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग के तीव्र विस्तार के बावजूद प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता और गहराई आज भी उसकी सबसे बड़ी ताकत है।

इस अवसर पर ‘छत्तीसगढ़’ अखबार के संपादक सुनील कुमार ने पुस्तक की अवधारणा और इसकी तैयारियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तृप्ति सोनी पिछले कई वर्षों से इस विषय पर काम कर रही थीं। जिन वरिष्ठ पत्रकारों के साक्षात्कार पुस्तक में शामिल हैं, उनमें से कुछ कार्यक्रम में बाहर होने के कारण शामिल नहीं हो सके, जबकि कुछ दिवंगत पत्रकारों के परिजन कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

यह पुस्तक छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता की समृद्ध परंपरा का महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है। इसमें प्रदेश के अनेक वरिष्ठ पत्रकारों और चिंतकों के जीवन, विचार और योगदान को दर्ज किया गया है। इनमें गुरुदेव कश्यप, मायाराम सुरजन, ललित सुरजन, गोविंद लाल वोरा, रमेश नैयर, बबन प्रसाद मिश्र, राज नारायण मिश्रा, जयशंकर नीरव, दिवाकर मुक्तिबोध, आशा शुक्ला, सुनील कुमार, रुचिर गर्ग, आलोक पुतुल, दिनेश आकुला और संदीप ठाकुर जैसे पत्रकारिता के महत्वपूर्ण नाम शामिल हैं।

पुस्तक के विमोचन के अवसर पर मंच पर वरिष्ठ पत्रकार ललित सुरजन की पत्नी माया सुरजन, पूर्व IAS और साहित्यकार सुशील त्रिवेदी, वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश दुबे, रुचिर गर्ग, सुभाष मिश्र, सुनील कुमार, गिरीश मिश्रा, मनीष मिश्रा, सुदीप ठाकुर, राजनारायण मिश्र के पुत्र और आशा शुक्ला की बेटी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। वहीं इस कार्यक्रम में कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला, बीजेपी प्रवक्ता गौरीशंकर श्रीवास, जयप्रकाश मानस, डॉ राकेश गुप्ता समेत देश और प्रदेश के जानेमाने पत्रकार और साहित्यकार मौजूद रहे।

कार्यक्रम में सुनील कुमार ने यह भी घोषणा की कि यह उनके प्रकाशन समूह की पहली पुस्तक है, लेकिन आगे से नियमित रूप से पुस्तकों का प्रकाशन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश के कुछ प्रमुख व्यक्तित्वों की आत्मकथाओं के प्रकाशन की योजना भी अंतिम चरण में है और आने वाले महीनों में वे पुस्तकें भी सामने आ सकती हैं।

उन्होंने अपनी आगामी फोटो-बुक के बारे में जानकारी देते हुए उससे जुड़ी एक छोटी फिल्म भी उपस्थित लोगों को दिखाई।

इस अवसर पर तृप्ति सोनी द्वारा भूतपूर्व नक्सल महिलाओं से बातचीत पर आधारित फिल्म ‘वो लौट आई हैं’ का भी प्रदर्शन किया गया। सुनील कुमार ने बताया कि तृप्ति सोनी अब अपने नाम से एक सिग्नेचर प्रोग्राम शुरू करेंगी और ‘छत्तीसगढ़’ अखबार के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तथा इसके यूट्यूब चैनल ‘इंडिया-आजकल’ के डिजिटल संचालन से भी जुड़ेंगी।

अपने व्याख्यान में प्रकाश दुबे ने छत्तीसगढ़ के पत्रकारों के साथ अपने दशकों पुराने संबंधों का जिक्र करते हुए कई संस्मरण साझा किए। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद प्रदेश की वरिष्ठ महिला पत्रकार आशा शुक्ला के संघर्षपूर्ण रिपोर्टिंग के दिनों को भी याद किया।

राजधानी के विमतारा सभागृह में आयोजित इस कार्यक्रम में शहर के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। मंच पर ‘छत्तीसगढ़’ अखबार के सभी वरिष्ठ सदस्य भी उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *