माइंस में अनियमितताओं के आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग, नही तो होगी आंदोलनप्रेसवार्ता कर जताई नाराजगी

भानुप्रतापपुर। आरीडोंगरी स्थित सीएमडीसी माइंस को लेकर क्षेत्र में विवाद दिन ब दिन गहराता जा रहा है। आदिवासी किसान विकास समिति आरीडोंगरी के कुछ पदाधिकारियों एवं खनन ठेकेदार पर गंभीर आरोप लगाते हुए क्षेत्र के कुछ लोगों ने प्रेसवार्ता करते हुए अनियमितताओं पर प्रकाश डालते हुए निष्पक्ष जांच कर कार्यवाही की मांग की गई है।प्रेसवार्ता कर रमल कोर्राम एवं अन्य वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि वे माइंस या शासन-प्रशासन के विरोध में नहीं हैं, बल्कि माइंस में हो रही कथित गलत गतिविधियों और भ्रष्ट सिस्टम का विरोध कर रहे हैं।

मुख्य आरोप बिंदुवार1, भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताआरोप है कि माइंस में वर्करों की भर्ती बिना ग्राम पंचायतों और समिति के सभी सदस्यों की सहमति के की गई। प्रभावित गांवों को नजरअंदाज कर बाहरी लोगों को गुपचुप तरीके से रोजगार दिया गया।2, कम मजदूरी और शोषणकुछ मजदूरों को “प्रशिक्षण” के नाम पर ₹180 प्रतिदिन जैसी कम दर पर काम कराया जा रहा है, जो सरकारी मजदूरी दर और माइनिंग गाइडलाइन से भी कम बताया जा रहा है। 3,पदाधिकारियों पर कमीशनखोरी के आरोपसमिति के कुछ पदाधिकारियों द्वारा अपनी निजी गाड़ियां और मशीनें माइंस में लगाकर खनन ठेकेदार से कमीशन लेने का आरोप लगाया गया है।4, 2% विकास राशि का हिसाब नहीं माइंस अनुबंध के तहत क्षेत्रीय विकास के लिए मिलने वाली 2% लाभांश राशि का कोई सार्वजनिक लेखा-जोखा नहीं दिया गया है।5, राशि वसूली और पारदर्शिता पर सवाल परिवहन कार्य हेतु स्थानीय लोगों से ₹5000, वर्करों से ₹1100 और बाहरी लोगों से ₹11000 तक राशि लेने का आरोप है। साथ ही प्रति ट्रिप ₹100 वसूली का भी उल्लेख किया गया, जिसका कोई ऑडिट या सार्वजनिक विवरण नहीं है।6, परिवहन ठेकेदारी में पक्षपातसमिति के नाम का उपयोग कर कुछ पदाधिकारी खुद परिवहन ठेके ले रहे हैं और अन्य स्थानीय परिवहनकर्ताओं के अधिकारों का हनन कर रहे हैं।7, खनिज दर में गिरावट से नुकसान लौह अयस्क की नीलामी दरों में कमी से शासन को करोड़ों रुपये का नुकसान होने का दावा किया गया है, जिसे मिलीभगत का परिणाम बताया जा रहा है।8, रोजगार देने के वादे अधूरेमाइंस शुरू करते समय स्थानीय लोगों को 1500–2000 रोजगार देने का आश्वासन दिया गया था, जो अब तक पूरा नहीं हुआ। दबाव और भय का माहौलवक्ताओं ने आरोप लगाया कि विरोध करने वालों पर मानसिक दबाव बनाया जा रहा है और मजदूरों व ग्रामीणों को गुमराह कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।उन्होंने ने कहा कि निष्पक्ष जांच की मांग की गई। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो क्षेत्रीय जनता के साथ मिलकर धरना-प्रदर्शन और अनशन किया जाएगा।

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