कोरबा। जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डॉक्टरों और स्टाफ की कथित लापरवाही के कारण एक 13 महीने की मासूम बच्ची की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि गलत इंजेक्शन लगाए जाने के बाद बच्ची की हालत बिगड़ी और वह कोमा में चली गई, जिसके बाद उपचार के दौरान देर रात उसने दम तोड़ दिया। इस घटना से आक्रोशित परिजन अस्पताल परिसर में धरने पर बैठ गए हैं और दोषी स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
परिजनों के अनुसार, 13 माह की वानिया केवट को 20 फरवरी को सर्दी और बुखार की शिकायत होने पर शासकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। बच्ची की नानी अमृता निषाद ने बताया कि भर्ती के दौरान जब एक प्रशिक्षु जैसी दिखने वाली कर्मचारी बच्ची को इंजेक्शन लगा रही थी, तब बच्ची काफी रो रही थी। मां के मना करने के बावजूद स्टाफ ने इंजेक्शन लगा दिया। आरोप है कि इंजेक्शन लगते ही बच्ची की सांसें अटकने लगीं और वह कोमा में चली गई। चार दिनों तक आईसीयू में जीवन और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद मंगलवार रात करीब 9:30 बजे डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना के बाद अस्पताल में तनाव की स्थिति निर्मित हो गई। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि यहां अधिकांश उपचार ट्रेनी डॉक्टरों और अप्रशिक्षित स्टाफ के भरोसे छोड़ा जा रहा है, जो मरीजों की जान के लिए खतरा बना हुआ है। प्रदर्शन के दौरान जब परिजनों ने अस्पताल अधीक्षक गोपाल कंवर को घेरने का प्रयास किया, तो वे अपने केबिन की ओर चले गए। इसके बाद गुस्साए लोग अस्पताल के गेट के सामने धरने पर बैठ गए।
परिजनों का स्पष्ट कहना है कि जब तक दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे बच्ची का पोस्टमार्टम नहीं कराएंगे। उनका यह भी आरोप है कि अस्पताल का स्टाफ अक्सर मोबाइल फोन में व्यस्त रहता है और मरीजों की देखभाल में गंभीरता नहीं बरतता। फिलहाल अस्पताल परिसर में सुरक्षा के लिहाज से पुलिस बल की स्थिति पर नजर बनी हुई है और प्रबंधन की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार किया जा रहा है।