नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले के कथित बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल जेम्स की जेल से रिहाई की याचिका बुधवार को खारिज कर दी। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि ब्रिटिश नागरिक मिशेल की दलीलों में कोई ठोस आधार नहीं है, जिसके चलते उसे फिलहाल जेल में ही रहना होगा।
जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडेजा की पीठ ने यह फैसला सुनाया। मिशेल ने अपनी याचिका में भारत और यूएई के बीच 1999 में हुई प्रत्यर्पण संधि के एक प्रावधान को चुनौती दी थी। उसका तर्क था कि किसी व्यक्ति पर केवल उन्हीं अपराधों के लिए मुकदमा चलना चाहिए जिनके लिए उसका प्रत्यर्पण हुआ है। इसके साथ ही उसने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को भी चुनौती दी थी, जिसमें उसे सात साल की सजा काट लेने के आधार पर रिहा करने से इनकार कर दिया गया था।
मिशेल का दावा था कि उसने दिसंबर 2025 तक जेल में सात साल पूरे कर लिए हैं और यह अवधि उसके कथित अपराधों की अधिकतम सजा के बराबर है। हालांकि, कोर्ट ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया। गौरतलब है कि मिशेल को दिसंबर 2018 में दुबई से भारत प्रत्यर्पित किया गया था और तब से वह सीबीआई और ईडी की हिरासत में है।
मामले के अन्य आरोपी बिचौलिए गुइडो हाश्के और कार्लो गेरोसा को पहले ही जमानत मिल चुकी है, लेकिन मिशेल जमानत की शर्तें पूरी न कर पाने के कारण जेल में ही है। सीबीआई के अनुसार, 2010 में हुए इस हेलीकॉप्टर सौदे से सरकारी खजाने को करीब 2666 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था, जबकि ईडी का आरोप है कि मिशेल को इस सौदे के बदले लगभग 225 करोड़ रुपये मिले थे। यूपीए सरकार के दौरान हुए इस 12 हेलीकॉप्टरों के सौदे में कई बड़े राजनेता और सैन्य अधिकारी भी जांच के घेरे में हैं।