रानीपरतेवा, गरियाबंद।
भारतीय संस्कृति का इतिहास त्याग और समर्पण से भरा हुआ है। भगवान श्रीरामचंद्र जी पितृ आज्ञा का पालन करते हुए राजमहल का त्याग कर वनवासी हो गए और भगवान श्रीकृष्ण जी, कारागृह में जन्म लेकर भी द्वारकाधीश हो गए, यह विधाता द्वारा रचा गया संसार का खेल है। यह उद्गार जनपद सदस्य पंकज निर्मलकर ने विगत दिवस ब्रह्माकुमारीज के दिव्य एवं अलौकिक शक्ति केंद्र, ओम शांति भवन रानीपरतेवा में पुराने वर्ष की विदाई और नव वर्ष के बधाई के अवसर पर आयोजित स्नेह मिलन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए।

सभा को संबोधित करते हुए ओम शांति भवन के प्रबंधक राजयोगी बीके श्रवण कुमार ने जन्म से मृत्यु तक के जीवन चक्र के रहस्य को बतलाते हुए कहा कि हर शिशु का जन्म रोते हुए होता है और जीवन यात्रा पूरी करते हुए मृत्युसैया पर भी रोते हुए विदाई लेता है, लेकिन नाम उनका अमर हो जाता है जो हंसते मुस्कुराते हुए इस संसार सागर से विदाई लेते हैं। जीवन की इस यात्रा में सुख-दुख, मान-अपमान, हार-जीत की अवस्था में भी जो इंसान समरस रहता है, वह जिंदगी के सफर का आनंद लेते हुए अपने श्रेष्ठ कर्मों के कारण इतिहास में अमर हो जाता है।

ओम शांति भवन की बढ़ती सेवाओं के मद्देनजर राजयोगी बीके योगेश कुमार को अगला प्रबंधक नियुक्त कर उन्हें कार्यभार सौंपा गया। कार्यक्रम को जनपद सदस्य अवधराम साहू, सरपंच हेमलाल नेताम, भाजपा मंडल के संगठन मंत्री पालेंद्र साहू तथा ग्राम कनेसर के सरपंच ने भी संबोधित किया। तत्पश्चात राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी अफसाना वंदना बहन ने परमपिता परमात्मा शिव तथा दिव्य शक्तियों को भोग स्वीकार कराया।

समारोह में कसेकेरा तथा फिंगेश्वरी की बच्चियों द्वारा रंगारंग नृत्य की प्रस्तुति दी गई। इस अवसर पर नाशिक (महाराष्ट्र), रायपुर, बिलासपुर, गरियाबंद, अभनपुर, तेंदुकोना, आरंग, राजिम, फिंगेश्वर, छुरा, मुहेरा, अमेठी, कसेकेरा, फिंगेश्वरी, अकलवारा, खड़मा, कनेसर, करकरा के अलावा बड़ी संख्या में ग्रामवासी शामिल हुए। कार्यक्रम के पश्चात सभी को ब्रह्मा भोजन कराया गया और अतिथियों को शाल व मोमेंटो तथा अन्य सभी को वस्त्र देकर सम्मानित किया गया। शिक्षक छोटेलाल सिंहा ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया। इसे सफल बनाने में बीके कुंजरानी निषाद, बीके वंदना कंवर, ग्राम पटेल साधुराम निषाद, मधुसूदन साहू, बसंत यादव और कोमल यदु की भूमिका सराहनीय रही।