भारतीय किसान यूनियन का राष्ट्रीय चिंतन शिविर: प्रयागराज रवाना हुआ छत्तीसगढ़ के 110 किसानों का दल

भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय चिंतन शिविर का आयोजन 16 से 18 जनवरी 2026 तक प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में किया जा रहा है। इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यक्रम में देशभर से किसान प्रतिनिधि भाग लेंगे। शिविर में शामिल होने के लिए छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से 110 किसानों का प्रतिनिधिमंडल दुर्ग–नवतनवा एक्सप्रेस से प्रयागराज के लिए रवाना हुआ।

यह दल प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही के नेतृत्व में रायपुर, गरियाबंद, बीजापुर, बस्तर सहित कई जिलों से निकला। प्रतिनिधिमंडल में गरियाबंद जिला अध्यक्ष मदन लाल साहू, बस्तर संभाग अध्यक्ष शिवा स्वर्णकार, बस्तर जिला अध्यक्ष रमेश गोयल, बीजापुर जिला अध्यक्ष सम्बय्या धंनूर तथा गरियाबंद जिला महासचिव योगेंद्र साहू प्रमुख रूप से शामिल हैं।

संगठनात्मक समीक्षा और भावी रणनीति पर होगा मंथन

इस अवसर पर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) छत्तीसगढ़ के प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही ने बताया कि संगठन की केंद्रीय कमेटी द्वारा प्रत्येक छह महीने में राष्ट्रीय स्तर पर चिंतन शिविर आयोजित किया जाता है। इन शिविरों में संगठनात्मक कार्यों की समीक्षा, पिछले आंदोलनों और कार्यक्रमों का मूल्यांकन तथा आगामी कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की जाती है।

उन्होंने कहा कि इस बार के चिंतन शिविर में छत्तीसगढ़ इकाई द्वारा प्रदेश की संगठनात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। साथ ही राज्य के किसानों और आम जनता से जुड़ी प्रमुख समस्याओं को प्रस्ताव के रूप में राष्ट्रीय मंच पर रखा जाएगा।

किसानों से जुड़े अहम मुद्दे रखे जाएंगे

छत्तीसगढ़ से जाने वाला प्रतिनिधिमंडल शिविर में कई महत्वपूर्ण मांगों को प्रमुखता से उठाएगा, जिनमें—

  • केंद्र द्वारा समर्थन मूल्य वृद्धि के अनुरूप छत्तीसगढ़ के किसानों को 3,286 रुपये प्रति क्विंटल धान मूल्य दिया जाना,
  • पाँचवीं और छठी अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा कानून का पूर्ण पालन,
  • कॉर्पोरेट विकास के नाम पर जल, जंगल, जमीन और पर्यावरण के विनाश पर रोक,
  • कावेरी बीज कंपनी द्वारा किसानों के साथ की गई कथित धोखाधड़ी के चलते उसे ब्लैकलिस्ट किए जाने की मांग,
  • खनन विस्तार से प्रभावित ग्रामीणों और किसानों पर हो रहे दमनात्मक कार्यवाहियों को बंद करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।

भारतीय किसान यूनियन का यह राष्ट्रीय चिंतन शिविर किसानों की साझा समस्याओं, अधिकारों और भविष्य की रणनीतियों को लेकर एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ देशभर से आए किसान प्रतिनिधि एकजुट होकर अपनी आवाज़ बुलंद करेंगे।

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