दीपका (कोरबा)। एसईसीएल की दीपका कोयला खदान में गुरुवार दोपहर हुई हैवी ब्लास्टिंग एक ग्रामीण के लिए जानलेवा साबित हुई। ब्लास्टिंग के दौरान उछले पत्थर की चपेट में आने से लखन पटेल (निवासी – रैकी) की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा सुआ-भोड़ी फेस पर उस समय हुआ, जब कथित तौर पर सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज कर ब्लास्टिंग कराई जा रही थी।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ब्लास्टिंग से पहले न तो पर्याप्त सेफ्टी ज़ोन तैयार किया गया था और न ही आसपास मौजूद लोगों को सुरक्षित दूरी पर हटाया गया। बताया जा रहा है कि उत्पादन के दबाव में अमानक तरीके से ब्लास्टिंग कराई जा रही थी, जिसकी कीमत एक ग्रामीण को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

हादसे के बाद भड़का आक्रोश, खदान में धरना-प्रदर्शन
घटना की जानकारी मिलते ही खदान क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया। ग्रामीणों, कर्मचारियों और श्रमिक संगठनों ने दीपका प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए लापरवाही को हादसे की मुख्य वजह बताया। आक्रोशित ग्रामीणों ने एसईसीएल दीपका कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया, जो कई घंटों तक चला।
लंबी बातचीत के बाद देर रात करीब 11 बजे प्रबंधन और प्रदर्शनकारियों के बीच सहमति बनी। समझौते के तहत मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने पर सहमति जताई गई, जिसके बाद आंदोलन समाप्त हुआ।

“उत्पादन पहले, सुरक्षा बाद में” का आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि दीपका खदान में लंबे समय से “उत्पादन पहले, सुरक्षा बाद में” की नीति अपनाई जा रही है। पूर्व में भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होने से ऐसे हादसे दोहराए जा रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि घटना के बाद भी प्रबंधन की ओर से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है और न ही जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई है। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह मामला भी अन्य हादसों की तरह फाइलों में दफन हो जाएगा, या इस बार लापरवाही बरतने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी।