कोलंबो/गाले। हिंद महासागर के शांत जल क्षेत्र में उस वक्त हड़कंप मच गया जब श्रीलंका के तट के पास एक ईरानी युद्धपोत भीषण हमले का शिकार होकर समुद्र में समा गया। अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के पांचवें दिन, अमेरिकी नौसेना ने भारत से लौट रहे ईरानी युद्धपोत ‘IRIS देना’ को टॉरपीडो से निशाना बनाकर डुबा दिया है। इस दिल दहला देने वाले हमले में अब तक 87 ईरानी नौसैनिकों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 100 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
विशाखापट्टनम से लौट रहा था युद्धपोत
जानकारी के मुताबिक, ईरानी युद्धपोत ‘IRIS देना’ पिछले महीने भारत के विशाखापट्टनम में आयोजित ‘2026 इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू’ में शामिल होने आया था। अपनी आधिकारिक यात्रा पूरी कर जब यह जहाज वापस ईरान की ओर लौट रहा था, तभी श्रीलंका के दक्षिणी तट से लगभग 40 समुद्री मील (75 किलोमीटर) दूर गाले शहर के पास इस पर हमला हुआ। जहाज पर कुल 180 नौसैनिक सवार थे।
अमेरिकी पनडुब्बी ने दागे टॉरपीडो
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि हिंद महासागर में तैनात एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी जहाज को ट्रैक किया और उस पर टॉरपीडो से हमला किया। हमले के बाद जहाज तेजी से पानी भरने के कारण समुद्र में समा गया। श्रीलंकाई नौसेना के कमांडर बुद्धिका संपत के अनुसार, जब बचाव दल मौके पर पहुँचा, तो वहां जहाज का नामोनिशान नहीं था; केवल समुद्र की सतह पर तेल के धब्बे और लाइफ राफ्ट तैरते नजर आ रहे थे।
रेस्क्यू ऑपरेशन और बचाव कार्य
बुधवार सुबह करीब 6 से 7 बजे के बीच जब जहाज से ‘डिस्ट्रैस कॉल’ (आपातकालीन संदेश) मिला, तो श्रीलंकाई नौसेना ने तुरंत मोर्चा संभाला। अब तक की स्थिति इस प्रकार है:
कुल सवार: 180 नौसैनिक
पुष्टि की गई मौतें: 87 शव बरामद
रेस्क्यू किए गए: 32 घायल नौसैनिक (अस्पताल में भर्ती)
लापता: 60 से अधिक नौसैनिकों की तलाश जारी
श्रीलंका के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि समुद्र में बड़े पैमाने पर खोज अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन समय बीतने के साथ लापता लोगों के जीवित बचने की उम्मीदें कम होती जा रही हैं।
वैश्विक तनाव और रणनीतिक असर
यह घटना अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध की विभीषिका को दर्शाती है। अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में एक युद्धपोत को डुबाना न केवल ईरान के लिए एक बड़ा सैन्य नुकसान है, बल्कि इससे वैश्विक समुद्री व्यापार मार्ग पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस हमले के बाद ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई की आशंका बढ़ गई है, जिससे खाड़ी देशों और हिंद महासागर में तनाव चरम पर पहुँच सकता है।
फिलहाल, श्रीलंकाई नौसेना और अंतरराष्ट्रीय बचाव दल लापता नौसैनिकों को ढूंढने की कोशिश में जुटे हैं। पूरी दुनिया की नजरें अब ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं।