बाजार में आधी हिस्सेदारी के करीब पहुंचे
राजकुमार मल
भाटापारा- वाशिंग पाउडर बनाने वाली लोकल इंडस्ट्रीज खुश हैं बाजार में बढ़ती हिस्सेदारी को देखकर। 40% मांग पर कब्जा के बाद अब लक्ष्य है 50 फ़ीसदी का। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए फ्री सोप और कैरी बैग या जूट बैग का ऑफर दे रहीं हैं।
ग्रीष्म ऋतु यानी धूल और चिपचिपी गर्मी, मतलब कपड़ों का जल्द गंदा होना। इसलिए यह मौसम वाशिंग पाउडर का सीजन माना जाता है लेकिन पहली बार प्रतिष्ठित ब्रांडेड कंपनियों के पसीने छूट रहे हैं अपनी स्थापित जगह को बरकरार रखने के लिए क्योंकि स्थानीय ईकाइयों द्वारा उत्पादित वाशिंग पाउडर से कड़ा मुकाबला करना पड़ रहा है। सस्ते हैं इसलिए मांग बढ़त लिए हुए हैं।
बाजार हिस्सेदारी 40 फ़ीसदी
स्थानीय स्तर पर वाशिंग पाउडर उत्पादन करने वाली कंपनियां 1 किलो के पैक के साथ एक साबुन फ्री में दे रहीं हैं, तो कुछ कंपनियां बैग या जूट बैग जैसा उपहार मुफ्त में दे रहीं हैं। ऐसे ऑफर के अलावा उत्पादन की प्रति किलो कीमत 2 से 4 रुपए कम ही हैं। इन सभी स्थितियों ने लोकल वाशिंग पाउडर की हिस्सेदारी 40% तक पहुंचा दी है। 50% तक पहुंचाने की कवायद चालू हो चली है।

महंगा होगा नहाने का साबुन?
नहाने का साबुन। सीजन इसका भी शुरू हो चुका है लेकिन इसकी खरीदी अब महंगी पड़ सकती है क्योंकि उत्पादन में जरूरी केमिकल की दर बढ़ चुकी है। रही- सही कसर जीएसटी की नई दर पूरी कर रही है। संकेत दो से तीन रुपए प्रति नग बढ़ने के मिल रहे हैं। स्थानीय स्तर पर नहाने का साबुन बनाने वाली कंपनियां फिलहाल नहीं हैं। इसलिए बढ़ी हुई कीमत स्वीकार करनी होगी उपभोक्ताओं को।
बढ़ेगी डिमांड क्योंकि…
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने आगत ग्रीष्मकाल के लिए जो पूर्वानुमान जारी किया है, उसके मुताबिक इस वर्ष तापमान नया रिकॉर्ड बना सकता है। इसलिए संभावित बढ़ने वाली मांग को देखते हुए वाशिंग पाउडर, वाशिंग सोप और बाथ सोप उत्पादन करने वाली ईकाइयों को मांग में 25 से 30% की वृद्धि की संभावना नजर आ रही है। लिहाजा अग्रिम तैयारियां चालू हो चलीं हैं।