नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली को शिक्षा का प्रमुख केंद्र माना जाता है, लेकिन यहां भी 13 ऐसे विश्वविद्यालय संचालित हो रहे हैं जिन्हें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से मान्यता प्राप्त नहीं है। यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि ये सभी संस्थान अवैध हैं और इनके द्वारा दी जाने वाली डिग्रियां किसी भी सरकारी नौकरी या उच्च शिक्षा के लिए मान्य नहीं होंगी। विशेषज्ञों ने छात्रों को चेतावनी दी है कि इन संस्थानों में दाखिला लेना उनकी मेहनत और धन की बर्बादी साबित हो सकता है।
यूजीसी द्वारा जारी सूची के अनुसार, दिल्ली में फर्जी विश्वविद्यालयों की संख्या सबसे अधिक है। इनमें अलीपुर स्थित आल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एंड फिजिकल हेल्थ साइंस, दरियागंज की कमर्शियल यूनिवर्सिटी लिमिटेड, यूनाइटेड नेशन्स यूनिवर्सिटी, वोकेशनल यूनिवर्सिटी और राजेंद्र प्लेस स्थित एडीआर-सेंट्रिक ज्यूरिडिकल यूनिवर्सिटी शामिल हैं। इसके अलावा रोहिणी का आध्यात्मिक विश्वविद्यालय, पीतमपुरा की वर्ल्ड पीस ऑफ यूनाइटेड नेशन्स यूनिवर्सिटी और जनकपुरी स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट सॉल्यूशन जैसे संस्थानों को भी फर्जी पाया गया है।
दिल्ली के बाहर अन्य राज्यों में भी फर्जी विश्वविद्यालयों का जाल फैला हुआ है। उत्तर प्रदेश में गांधी हिन्दी विद्यापीठ (प्रयाग), भारतीय शिक्षा परिषद् (लखनऊ) और अलीगढ़ की नेताजी सुभाष चन्द्र बोस यूनिवर्सिटी समेत कई संस्थान अवैध पाए गए हैं। इसी तरह हरियाणा के फरीदाबाद में मैजिक एंड आर्ट यूनिवर्सिटी, राजस्थान के भिवाड़ी में राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और झारखंड के रांची में दक्ष यूनिवर्सिटी को फर्जी घोषित किया गया है।
दक्षिण और पश्चिम भारत के राज्यों में भी कई अवैध संस्थान सक्रिय हैं। महाराष्ट्र में नागपुर की राजा अरेबिक यूनिवर्सिटी और सोलापुर का नेशनल बैकवर्ड कृषि विद्यापीठ इस सूची में शामिल हैं। वहीं आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और पश्चिम बंगाल के भी कई संस्थानों को यूजीसी ने अवैध करार दिया है। पुडुचेरी में श्री बोधि एकेडमी और उषा लात्चुमनन कॉलेज को भी मान्यता नहीं मिली है।
यूजीसी ने अभिभावकों और छात्रों के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। किसी भी विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने से पहले उसकी मान्यता की जांच यूजीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर करना अनिवार्य है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि फर्जी संस्थानों से शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों का भविष्य अधर में लटक सकता है क्योंकि इनकी डिग्री कानूनी रूप से शून्य मानी जाती है।