नायब तहसीलदार से आईएएस तक का सफर: बीरेंद्र पंचभाई ने छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक इतिहास में दर्ज कराया नाम

रायपुर: दिल्ली में आयोजित विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा के सात अधिकारियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा संवर्ग मिलने पर मुहर लग गई है। इन नामों में सबसे अधिक चर्चा बीरेंद्र पंचभाई की हो रही है। पंचभाई छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक इतिहास में पहले ऐसे अधिकारी बन गए हैं, जिन्होंने नायब तहसीलदार के पद से अपना सफर शुरू कर आईएएस के पद तक पहुंचने का गौरव हासिल किया है।

छत्तीसगढ़ में पहली बार बना ऐसा रिकॉर्ड

प्रशासनिक गलियारों में यह पदोन्नति एक मिसाल मानी जा रही है। सामान्यतः नायब तहसीलदार के पद पर नियुक्त होने वाले अधिकारी अपनी सेवानिवृत्ति तक डिप्टी कलेक्टर या अधिकतम अपर कलेक्टर के पद तक ही पहुंच पाते हैं। अविभाजित मध्यप्रदेश के समय से लेकर अब तक केवल एक अन्य अधिकारी का नाम सामने आता है जो इस ऊंचाई तक पहुंचे थे। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद पंचभाई यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले व्यक्ति हैं।

बीरेंद्र पंचभाई का प्रशासनिक सफर

मूल रूप से दुर्ग जिले के रहने वाले बीरेंद्र बहादुर पंचभाई का चयन वर्ष 1993 में नायब तहसीलदार के पद पर हुआ था। उन्होंने लंबे समय तक अभनपुर समेत विभिन्न क्षेत्रों में नायब तहसीलदार और तहसीलदार के रूप में सेवाएं दीं। अपनी कार्यक्षमता के आधार पर वर्ष 2010 में वे राज्य प्रशासनिक सेवा के लिए चयनित हुए। रायपुर में लंबे समय तक अपर कलेक्टर के पद पर रहने के बाद, वर्तमान में वे नारायणपुर जिले में अपर कलेक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

सात अधिकारियों को मिला आईएएस अवार्ड

उल्लेखनीय है कि इस सूची में बीरेंद्र पंचभाई के साथ ही तीर्थराज अग्रवाल, लीना कोसम, सौमिल रंजन चौबे, संदीप अग्रवाल सहित कुल सात अधिकारियों को आईएएस अवार्ड हुआ है। इस चयन की एक खास बात यह भी रही कि इस बार दो सगे भाइयों ने भी एक साथ भारतीय प्रशासनिक सेवा में अपनी जगह बनाई है। इस निर्णय के बाद राज्य के प्रशासनिक महकमे में हर्ष का माहौल है।

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