आचार्य चैतन्य महाराज छत्तीसगढ़ कार्यक्रम सम्पन्न कर आज अंबाला लौटे

गरियाबंद –खुर्सीपार समीपस्थ ग्राम सेमरढाप में आयोजित मद्भागवत सप्ताह अमर कथा कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ! कथा व्यास आचार्य सनातन चैतन्य महाराज अंबाला शहर हरियाणा वाले ने अंतिम दिवस श्रीमदभागवत गीता पर प्रवचन दिए उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म के चार प्रमुख ग्रंथ महाभारत,रामायण, गीता और भागवत हैं!इन चारों ग्रंथों में सार रूप से शिक्षा ले सकते हैं महाभारत से क्या करना है, रामायण से कैसे रहना है, गीता से कैसे जीना है और भागवत से मृत्यु को कैसे मंगलमय बना सकते हैं! आचार्य ने कहा कि गीता में अठारह अध्याय व कुल सात सौ श्लोक हैं! इसमें क्रमशः एक से छह अध्याय में भगवान ने कर्म के बारे में, छह से बारह अध्याय में भक्ति व बारह से अठारह अध्याय में ज्ञान योग की चर्चा किए हैं! गीता जीवन जीने की कला सिखाती हैं!

कार्यक्रम के अंत में गीता –भागवत प्रश्नोत्तरी हुई सही उतर देने वाले सभी भक्तों को आयोजक प्यारी लाल साहू व मास्टर सदानंद ध्रुव ने स्मृति प्रसाद प्रदान कर सम्मानित किया!

इसके पूर्व समष्टि हवन पण्डित भरत गिरी महाराज व रामबिहारी मिश्रा ने सातों परीक्षित दंपतियों को आहुतियां डलवाएं पूर्ण आहुति कथा व्यास आचार्य सनातन चैतन्य जी महाराज ने डाले और ग्राम की सुख शांति की कामना किए!
यजमान साहू परिवार ने मंच पर कथा व्यास जी व सभी विप्र गणों साथ ही सभी सहयोगी सदस्यों को वस्त्र दक्षिणा प्रदान कर सम्मानित किया! अंत में फूलों की होली खेली गई! भक्त लोग एक दूसरे के ऊपर फूल वर्षा कर खूब नाचे! भगवान की महाआरती पश्चात भंडारा हुआ हजारों लोगों ने भंडारा का प्रसाद ग्रहण किया!

दूसरे दिन महाराज को व साथ गए सुरेंद्र शर्मा,रमा शास्त्री महाराज, कोमल महाराज, ब्रह्मचारी रोहित भाई जी व रामबिहारी मिश्रा को भक्तों ने बिदाई दिए इस समय सभी के नेत्रों से अश्रु निकल रहे थे! उस समय बहुत ही गमननीय माहौल बन गया!उक्त कथा चिरस्मरणीय रही!

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