एक ही ज्योतिर्लिंग में शिव और शक्ति: काशी विश्वनाथ के इन 7 रहस्यों को जानकर रह जाएंगे हैरान

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा तट पर स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर केवल एक तीर्थस्थल नहीं है, बल्कि यह सनातन धर्म की अटूट श्रद्धा और दिव्य ऊर्जा का केंद्र है। भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख इस मंदिर को मोक्ष की नगरी का हृदय माना जाता है। युगों से ऋषियों और भक्तों की आस्था का केंद्र रहे इस मंदिर से कई ऐसे अनसुने तथ्य जुड़े हैं, जो इसे आध्यात्मिक रूप से अद्वितीय बनाते हैं।

शिव और शक्ति का दुर्लभ संयोजन

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग का स्वरूप दो भागों में विभाजित है, जो शिव और शक्ति की एकात्मकता को दर्शाता है। इसके दाहिनी ओर शक्ति स्वरूपा मां भगवती और बाईं ओर भगवान शिव विराजमान हैं। संसार के अन्य ज्योतिर्लिंगों की तुलना में यह संयोजन अत्यंत दुर्लभ है। मान्यता है कि इसी कारण काशी को मुक्ति क्षेत्र कहा जाता है, जहां शिव और शक्ति के मिलन से आत्मा को मोक्ष प्राप्त होता है।

मोक्ष का द्वार और तारक मंत्र

मंदिर में मां भगवती का स्थान दाहिनी ओर होने के कारण यहां से मोक्ष का मार्ग खुलता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, काशी में मृत्यु अंत नहीं बल्कि जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति है। कहा जाता है कि भगवान शिव स्वयं भक्त के कान में तारक मंत्र फूंकते हैं, जिससे अकाल मृत्यु प्राप्त व्यक्ति को भी सद्गति मिलती है।

शृंगार और पश्चिम मुखी मूर्तियां

विशेष शृंगार के समय यहां की सभी मूर्तियां पश्चिम मुखी हो जाती हैं। यह वह विशेष क्षण होता है जब शिव और शक्ति की उपस्थिति एक साथ महसूस की जा सकती है। एक ही गर्भगृह और एक ही ज्योतिर्लिंग में दोनों की उपस्थिति इस स्थान को भक्ति के साथ-साथ तंत्र साधना की दृष्टि से भी सिद्ध स्थल बनाती है।

शिखर पर श्री यंत्र और वास्तु का महत्व

मंदिर के गर्भगृह के ऊपर स्थित शिखर श्री यंत्र से सुसज्जित है, जो लक्ष्मी और शक्ति साधना का प्रतीक है। इसके अलावा, बाबा का ज्योतिर्लिंग ईशान कोण में स्थित है। वास्तु शास्त्र के अनुसार ईशान कोण विद्या, ज्ञान और साधना का प्रतीक माना जाता है। मंदिर का मुख्य द्वार दक्षिण मुखी है, जबकि बाबा का मुख उत्तर यानी अघोर दिशा की ओर है। मान्यता है कि प्रवेश करते ही भक्त को शिव के अघोर रूप के दर्शन होते हैं, जिससे समस्त पापों का नाश होता है।

चार द्वारों का आध्यात्मिक महत्व

बाबा विश्वनाथ के दरबार में चार प्रमुख द्वार हैं, जिन्हें शांति द्वार, कला द्वार, प्रतिष्ठा द्वार और निवृत्ति द्वार कहा जाता है। ये द्वार केवल प्रवेश मार्ग नहीं, बल्कि तांत्रिक साधना और चेतना के विशेष आयाम माने जाते हैं। ऐसा संयोजन पूरे विश्व में अन्य कहीं देखने को नहीं मिलता, जो भक्तों को चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति का मार्ग दिखाता है।


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