नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए करीब 5 करोड़ रुपये मूल्य की नशीली और नकली दवाएं बरामद की हैं। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान गिरोह के मास्टरमाइंड अरुण सहित कुल नौ सदस्यों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह तस्करी कर लाए गए ट्रामाडोल पाउडर से नशीली गोलियां तैयार कर उन्हें हेरोइन के विकल्प के रूप में नशेड़ियों को ऊंचे दामों पर बेचता था।
पुलिस और औषधि नियंत्रक विभाग की संयुक्त टीम ने विभिन्न राज्यों में छापेमारी कर दो फर्जी दवा फैक्ट्रियों को सील किया है। मुख्य आरोपी अरुण ने कम समय में अधिक मुनाफा कमाने के लिए अवैध रूप से फैक्ट्री स्थापित की थी। जांच में पाया गया कि ‘स्टेट लाइव साइंस प्राइवेट लिमिटेड’ नामक फैक्ट्री केवल दवाओं के परीक्षण के लिए पंजीकृत थी, लेकिन इसकी आड़ में बड़े पैमाने पर नकली टैबलेट और इंजेक्शन तैयार किए जा रहे थे। इन दवाओं की सप्लाई दिल्ली, बिहार के गया और अन्य प्रमुख शहरों के अवैध मेडिकल स्टोर्स पर की जा रही थी।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 1,19,800 नकली जिंक गोलियां, 42,480 एजिथ्रोमाइसिन गोलियां, 27 किलोग्राम पैरासिटामोल और भारी मात्रा में डिलोना एक्वा एम्प्यूल बरामद किए हैं। इसके साथ ही नकली दवा बनाने वाली भारी मशीनरी और उपकरण भी जब्त किए गए हैं। सहायक औषधि नियंत्रक विजय कुमार के अनुसार, आरोपी परीक्षण की अनुमति का दुरुपयोग कर समाज के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे थे।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इन नकली और नशीली दवाओं का सेवन जानलेवा साबित हो सकता है। इनके उपयोग से फेफड़ों और दिमाग पर बुरा असर पड़ता है, साथ ही लिवर, किडनी फेल होने और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सप्लायर्स और अवैध केंद्रों की पहचान करने में जुटी है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ के बाद इस सिंडिकेट से जुड़े कुछ और बड़े नामों का खुलासा हो सकता है।