महाशिवरात्रि कल, जानिए जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

नई दिल्ली। देशभर में कल महाशिवरात्रि का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। मान्यता है कि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था, इसलिए हर वर्ष इसी तिथि पर महाशिवरात्रि मनाई जाती है। इस दिन भक्त व्रत रखकर शिवलिंग का जलाभिषेक और विधिवत पूजा करते हैं। मंदिरों और शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ रहेगी।

महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त
पहला मुहूर्त सुबह 08.24 बजे से 09.48 बजे तक
दूसरा मुहूर्त सुबह 09.48 बजे से 11.11 बजे तक
तीसरा मुहूर्त सुबह 11.11 बजे से दोपहर 12.35 बजे तक
चौथा मुहूर्त सुबह 06.11 बजे से 07.47 बजे तक

चार प्रहर पूजा का समय
पहला प्रहर 15 फरवरी शाम 06.11 बजे से रात 09.23 बजे तक
दूसरा प्रहर रात 09.23 बजे से रात 12.35 बजे तक
तीसरा प्रहर 16 फरवरी रात 12.35 बजे से सुबह 03.47 बजे तक
चौथा प्रहर 16 फरवरी सुबह 03.47 बजे से 06.59 बजे तक

तिथि और पारण
हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी 15 फरवरी शाम 05.04 बजे से शुरू होकर 16 फरवरी शाम 05.34 बजे तक रहेगी। व्रत 15 फरवरी को रखा जाएगा और पारण 16 फरवरी सुबह 06.59 बजे से दोपहर 03.24 बजे के बीच किया जा सकेगा।

दस शुभ योग बनेंगे
इस वर्ष महाशिवरात्रि पर शिव योग, सर्वार्थ सिद्धि, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, साध्य, शुक्ल और ध्रुव योग बनेंगे। साथ ही व्यतिपात और वरियान योग भी रहेंगे।

चार प्रमुख राजयोग
कुंभ राशि में बुध और सूर्य की युति से बुधादित्य राजयोग बनेगा। बुध और शुक्र से लक्ष्मी नारायण राजयोग बनेगा। सूर्य और शुक्र से शुक्रादित्य योग बनेगा। शनि अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में रहकर शश महापुरुष राजयोग बनाएंगे। सूर्य, बुध, शुक्र और राहु की उपस्थिति से चतुर्ग्रही योग भी बनेगा।

पूजन सामग्री
बेलपत्र, शमी पत्र, धतूरा, भांग, दीपक, आक का फूल, सफेद फूल, चंदन, रोली, सिक्का, अक्षत, सुपारी, कलश, लौंग, इलायची, जनेऊ, नारियल, मिठाई और फल

पूजन विधि
सुबह जल्दी उठकर व्रत का संकल्प लें। साफ स्थान पर चौकी रखकर उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और चावल रखकर भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करें। तांबे या मिट्टी के कलश पर स्वास्तिक बनाकर उसमें जल और गंगाजल भरें तथा सुपारी, सिक्का और हल्दी डालें। इसके बाद घी का दीपक जलाएं और शिवलिंग स्थापित कर विधि विधान से पूजा और जलाभिषेक करें। चाहे तो मिट्टी से नया शिवलिंग बनाकर भी पूजा की जा सकती है।

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