कागजों पर एम्बुलेंस की घोषणा, हकीकत में 154 सेंटर खाली; स्वास्थ्य विभाग के सर्वे में स्वास्थ्य सेवाओं की खराब स्थिति

जयपुर। राजस्थान में ग्रामीण और निचले स्तर के स्वास्थ्य संस्थानों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा हाल ही में किए गए एक औचक निरीक्षण में खुलासा हुआ है कि प्रदेश के 64 प्रतिशत स्वास्थ्य केंद्रों पर एम्बुलेंस की सुविधा ही उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा कई केंद्रों पर पर्याप्त चिकित्सा कर्मचारी और दवाइयों की भी भारी कमी पाई गई है।

स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, जोनल ज्वाइंट डायरेक्टर और सीएमएचओ सहित 500 से अधिक अधिकारियों की टीम ने प्रदेश के 560 केंद्रों का रैंडम सर्वे किया। इस जांच के दायरे में जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) शामिल थे। सर्वे में पाया गया कि जिन 239 केंद्रों पर एम्बुलेंस की उपलब्धता जांची गई, उनमें से केवल 85 केंद्रों पर ही यह सुविधा मिली। शेष 154 केंद्रों पर एम्बुलेंस न होने के कारण गंभीर मरीजों को रेफर करने में बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि जिन केंद्रों पर एम्बुलेंस मौजूद हैं, उनमें से 4 प्रतिशत वाहन चलने की स्थिति में नहीं हैं। स्वच्छता के मानकों पर भी 9 प्रतिशत संस्थानों की स्थिति खराब पाई गई है। समय पालन के मामले में भी लापरवाही देखी गई, जहां सुबह 9 बजे की जांच के दौरान 2 प्रतिशत केंद्र बंद मिले और वहां कोई भी स्टाफ मौजूद नहीं था।

रिपोर्ट के अनुसार, 7 संस्थानों में इलाज और अन्य सुविधाएं अत्यंत निम्न स्तर की पाई गईं, जहां दवाइयों का भी स्टॉक उपलब्ध नहीं था। हालांकि, 123 संस्थानों में सुविधाओं का स्तर संतोषजनक माना गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को नई घोषणाओं से पहले मौजूदा केंद्रों की व्यवस्था सुधारने पर ध्यान देना चाहिए ताकि आमजन को समय पर प्राथमिक उपचार मिल सके।

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