उत्तर प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 40 मुकदमे हटाने वाले बयान पर सनातन धर्म के प्रमुख नेता स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कड़ा पलटवार किया है। स्वामी ने कहा कि यह “कानून का पालन” नहीं बल्कि कानून का उल्लंघन है। उन्होंने सवाल उठाया कि कोई भी बड़े पद पर पहुँचने के बाद अपने ऊपर दर्ज मुकदमे हटवा सकता है या नहीं।

स्वामी का बयान
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, “उत्तर प्रदेश की विधानसभा में खड़े होकर सीएम ने कहा कि मैं कानून का पालन कर रहा हूं। अगर आप सच में कानून का पालन करना चाहते हैं तो 45 मुकदमों का कोर्ट में सामना कीजिए। आप अपने ऊपर लगे 40 मुकदमों को हटवाकर ‘कानून का पालन’ कैसे कर रहे हैं?”
मीडिया से बातचीत में उन्होंने यह भी कहा कि सनातन धर्म में किसी शंकराचार्य की पहचान राजनीतिक स्वीकृति से नहीं होती। यह धार्मिक परंपरा और आध्यात्मिक मानदंडों से तय होता है। किसी मुख्यमंत्री या सरकार को यह अधिकार नहीं है कि प्रमाणपत्र देकर किसी को शंकराचार्य घोषित किया जाए। उन्होंने अदालतों के आदेश का भी हवाला दिया, जिसमें शंकराचार्य घोषित किए जाने पर रोक लगी हुई है।
सपा पर योगी के निशाने का जवाब
सीएम योगी ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा था कि यदि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य थे, तो लाठीचार्ज क्यों हुआ। इस पर स्वामी ने पलटवार किया कि “जब लाठीचार्ज हुआ था, हम शंकराचार्य नहीं थे। अगर समाजवादी पार्टी ने किसी पर लाठी चलाई तो वह गलत था। वही चीज आप कर रहे हैं, तो आप कहां से सही हो?” उन्होंने योगी आदित्यनाथ की कार्रवाई को भी गलत बताया।
सीएम योगी का पक्ष
सदन में योगी ने कहा कि शंकराचार्य का पद सनातन धर्म में सर्वोच्च और पवित्र माना जाता है। साढ़े चार करोड़ श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था बनाई गई है और कानून सभी के लिए बराबर है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री या कोई व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।