उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के पांचवें दिन सदन में जगद्गुरु शंकराचार्य और मौनी अमावस्या का मामला गूंजा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शंकराचार्य का पद सनातन धर्म में सर्वोच्च और पवित्र है और हर कोई इसे नहीं अपना सकता। उन्होंने कहा कि कानून और व्यवस्था सभी के लिए बराबर है और कोई व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।

योगी ने सदन में कहा, “क्या हर कोई मुख्यमंत्री बनकर प्रदेश में घूम जाएगा? कोई भी मंत्री का बोर्ड लगाकर घूम जाएगा? शंकराचार्य के पद की भी यही मर्यादा है। हर पीठ का आचार्य नियमों और परंपरा का पालन करते हुए ही कार्य करता है।”
शंकराचार्य की चार पीठों की पवित्र परंपरा
CM योगी ने कहा कि आदि जगद्गुरु शंकराचार्य ने भारत के चार कोनों में चार मठों की स्थापना की:
- उत्तर में – ज्योतिष्पीठ
- दक्षिण में – श्रृंगेरी
- पूर्व में – जगन्नाथ पुरी
- पश्चिम में – द्वारिका पुरी
इन चार पीठों में चार वेदों का प्रचार होता है – ऋग्वेद (प्रज्ञानं ब्रह्म), यजुर्वेद (अहं ब्रह्मास्मि), सामवेद (तत्वमसि), और अथर्ववेद (अयात्मा ब्रह्म), जो बुद्धि और आत्मा की पवित्रता को दर्शाते हैं।
हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं बन सकता
योगी ने स्पष्ट किया कि पीठ का आचार्य बनने के लिए विद्वत परिषद द्वारा स्वीकृति आवश्यक है। “हर कोई शंकराचार्य नहीं लिख सकता, हर पीठ के आचार्य के रूप में जाकर माहौल खराब नहीं कर सकता। मर्यादाओं का पालन सभी को करना होगा।”
मौनी अमावस्या और कानून का पालन
मौनी अमावस्या के दिन साढ़े चार करोड़ श्रद्धालु माघ मेले में पहुंचे। योगी ने कहा कि कानून सभी के लिए बराबर है। “मैं भी कानून से ऊपर नहीं हूं। जो श्रद्धालु सुरक्षित रूप से बाहर निकलें, इसके लिए नियमों का पालन जरूरी है।”
उन्होंने समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधा और कहा कि पूर्व में वाराणसी में लाठीचार्ज और एफआईआर के मामले कानून और मर्यादा के विपरीत थे। योगी ने सभी राजनीतिक दलों से जिम्मेदारी और कानून का पालन करने की अपील की।