नई दिल्ली। भारत सरकार ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे एक महत्वाकांक्षी अंडरवाटर रोड-रेल सुरंग निर्माण की योजना पर काम कर रही है। लगभग 19,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाला यह प्रोजेक्ट असम के गोहपुर और नुमलीगढ़ को आपस में जोड़ेगा। यह देश की पहली ऐसी सुरंग होगी, जिसमें सड़क और रेल मार्ग दोनों की सुविधा एक साथ उपलब्ध होगी। केंद्रीय कैबिनेट द्वारा जल्द ही इस परियोजना को औपचारिक मंजूरी दी जा सकती है।
इस परियोजना के अंतर्गत नदी के नीचे दो अलग-अलग ट्यूब वाली सुरंगों का निर्माण किया जाएगा, जिनमें से एक सड़क यातायात और दूसरी रेल आवाजाही के लिए होगी। वर्तमान में ब्रह्मपुत्र नदी को नाव या पुल के माध्यम से पार करने में करीब 4 से 6 घंटे का समय लगता है, जो सुरंग बनने के बाद घटकर मात्र 30 मिनट रह जाएगा। यह सुरंग हर मौसम में चालू रहेगी और बाढ़ व बारिश जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगी।
रणनीतिक दृष्टि से यह सुरंग भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। चीन और म्यांमार की सीमाओं से सटे होने के कारण आपात स्थिति में सेना, हथियारों और रसद को तेज गति से सीमा तक पहुंचाना अनिवार्य है। विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध की स्थिति में पुलों को निशाना बनाना आसान होता है, लेकिन पानी के नीचे बनी सुरंग सुरक्षित रहेगी। बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल राजीव चौधरी (सेवानिवृत्त) ने इसे पूर्वोत्तर को राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़ने वाली रणनीतिक जीवनरेखा बताया है।
आर्थिक मोर्चे पर भी यह सुरंग असम और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए गेम-चेंजर साबित होगी। इससे स्थानीय उत्पादों जैसे चाय, फल और सब्जियों की सप्लाई चेन मजबूत होगी और परिवहन लागत में कमी आएगी। बेहतर कनेक्टिविटी से क्षेत्र में निजी निवेश बढ़ेगा, फैक्ट्रियां लगेंगी और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। ब्रह्मपुत्र अंडरवाटर सुरंग न केवल इंजीनियरिंग का एक उत्कृष्ट उदाहरण होगी, बल्कि देश की सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास को भी नई ऊंचाई प्रदान करेगी।