जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं और इंडियन ओवरसीज बैंक के बीच एमओयू
रमेश गुप्ता रायपुर ।
छत्तीसगढ़ की विभिन्न जेलों में निरुद्ध बंदियों एवं कैदियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य शासन द्वारा सतत प्रयास किए जा रहे हैं। जेलों में बंदियों को विभिन्न क्षेत्रों में कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, ताकि रिहाई के पश्चात वे सम्मानजनक जीवन की ओर अग्रसर हो सकें।
इसी कड़ी में रिहाई उपरांत बंदियों को स्वरोजगार हेतु आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं, छत्तीसगढ़ तथा इंडियन ओवरसीज बैंक के मध्य एक महत्वपूर्ण एम.ओ.यू. निष्पादित किया गया है।
एमओयू के तहत ऐसे बंदी, जो जेल में कौशल विकास प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं अथवा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, उन्हें रिहाई के पश्चात पात्रता के आधार पर स्वरोजगार स्थापित करने हेतु बैंक द्वारा ऋण एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इससे वे स्वयं का व्यवसाय प्रारंभ कर आत्मनिर्भर बन सकेंगे।
यह पहल न केवल बंदियों के पुनर्वास को सुदृढ़ करेगी, बल्कि समाज की मुख्यधारा में उनकी सकारात्मक पुनर्स्थापना सुनिश्चित करने में भी सहायक सिद्ध होगी। राज्य शासन का यह प्रयास पुनर्वास-आधारित सुधारात्मक दृष्टिकोण को मजबूत करते हुए बंदियों के जीवन में नई उम्मीद और नई दिशा प्रदान करेगा।
जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं, छत्तीसगढ़ द्वारा इस पहल को समाज में पुनर्स्थापन और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।