सक्ती। ग्राम पंचायत डोंगिया में आयोजित तीन दिवसीय ‘सुखद सत्संग अमृत कथा’ के दूसरे दिन श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस विशेष अवसर पर श्रीमती संयोगिता युद्धवीर सिंह जूदेव और पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष नरेश गेवाडीन ने राष्ट्रीय संत असंग देव जी को शाल एवं श्रीफल भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया और सत्संग का आनंद लिया।
कबीर की वाणी जीवन का आधार: संयोगिता जूदेव
सत्संग के दौरान संयोगिता युद्धवीर सिंह जूदेव ने कबीर साहेब के दर्शन पर जोर देते हुए कहा कि कबीर की वाणी और असंग देव जी के उपदेशों को जीवन में उतारना ही मनुष्य की असली भलाई है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति कबीर जी के केवल एक दोहे को भी पूरी तरह अपने जीवन में अपना ले, तो वह इस भवसागर से पार हो सकता है।

माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ा भजन: असंग देव
अपने प्रवचनों में संत असंग देव जी ने मनुष्य के चंचल मन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “दूसरों को समझाना आसान है, लेकिन स्वयं को समझना सबसे कठिन साधना है।” संत जी ने बुजुर्गों के सम्मान पर विशेष संदेश देते हुए कहा कि जो व्यक्ति अपने माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा करता है, उसे किसी अन्य सत्संग या भजन की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि धरती पर माता-पिता ही साक्षात भगवान हैं। उन्होंने धन के लोभ को दुख का कारण और त्याग को सच्चे सुख का मार्ग बताया।
हजारों श्रद्धालुओं ने उतारी महाआरती
इस तीन दिवसीय आयोजन में सक्ती और आस-पास के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कार्यक्रम के अंत में गुरु कबीर दास जी की भव्य महाआरती की गई, जिसके बाद सभी भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन को लेकर पूरे क्षेत्र में धर्म और भक्ति का माहौल बना हुआ है।