चारामा। प्रांतीय अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) संघ छत्तीसगढ़ के बैनर तले चारामा विकासखंड के अतिथि शिक्षकों ने क्षेत्रीय विधायक सावित्री मंडावी को ज्ञापन सौंपकर अपनी लंबित मांगों को स्कूल शिक्षा मंत्री तक पहुंचाने और आगामी विधानसभा सत्र में उठाने की मांग रखी है। इस अवसर पर संघ की प्रांतीय अध्यक्ष अन्नपूर्णा पांडे, जिला अध्यक्ष राकेश कुमार राय, ब्लॉक अध्यक्ष मोहम्मद आरिफ सहित निर्मला साहू, टिकेश्वरी साहू, तामेश्वर नागे और चमन साहू उपस्थित रहे। संयुक्त शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष अशोक कुमार गोटे, जिला प्रवक्ता प्रेम प्रकाश साहू और हलदर सिंह ठाकुर ने भी इस मांग का समर्थन किया है।
10 साल से सेवाएं, पर सुविधाओं का अभाव
विधायक को सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया कि अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) सत्र 2015-16 से बस्तर, सरगुजा संभाग और अन्य आदिवासी सुदूर क्षेत्रों में व्याख्याता के स्वीकृत पदों पर नियमित शिक्षकों की भांति कार्य कर रहे हैं। ये शिक्षक निर्वाचन कार्य, बोर्ड परीक्षा मूल्यांकन, और एनएसएस प्रभारी जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं और NCTE के नियमों के तहत पूरी योग्यता (स्नातकोत्तर एवं बीएड) रखते हैं। इसके बावजूद पिछले 10 वर्षों से ये अपनी जायज मांगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
प्रमुख मांगें और विधानसभा के लिए ज्वलंत मुद्दे
अतिथि शिक्षकों ने विधायक से मांग की है कि विधानसभा सत्र में निम्नलिखित मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाए:
वेतन और अवकाश: 12 माह का मानदेय, ग्रीष्मकालीन अवकाश का वेतन, वार्षिक वेतन वृद्धि और ‘ग्रेड पे’ निर्धारित किया जाए। साथ ही आकस्मिक, अर्जित, चिकित्सा और मातृत्व/पितृत्व अवकाश की सुविधा मिले।
मोदी की गारंटी: चुनाव घोषणा पत्र 2023 के अनुसार, 100 दिनों में कमेटी बनाकर नियमितीकरण/संविलयन का जो वादा किया गया था, वह कब पूरा होगा?
समान कार्य-समान वेतन: जब योग्यता और कार्य नियमित व्याख्याताओं के समान है, तो वेतन में इतना अंतर क्यों है?
कोर्ट के आदेश का पालन: उच्च न्यायालय बिलासपुर के आदेश (WPS NO.5573/2024) के तहत ग्रीष्मकालीन मानदेय और अवकाश प्रदान करने का निराकरण कब तक होगा?
समायोजन और संविलियन पर सवाल
शिक्षकों ने तर्क दिया कि जब शिक्षाकर्मियों का 2 से 8 वर्ष की सेवा के बाद संविलियन किया जा सकता है, और ‘प्रभुदत्त खेरा अभ्यारण्य शिक्षण समिति’ के कर्मचारियों को नियमों में ढील देकर समायोजित किया जा सकता है, तो बस्तर-सरगुजा के सुदूर अंचलों में 10 साल से कार्यरत अतिथि शिक्षकों के साथ यह भेदभाव क्यों? उन्होंने मांग की है कि सहायक शिक्षक विज्ञान प्रयोगशाला की तर्ज पर उनका भी विभाग में संविलियन या समायोजन किया जाए।