भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत से पहले प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र लिखकर सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए हैं। पटवारी ने राज्यपाल के आगामी अभिभाषण को वास्तविक स्थितियों से दूर बताते हुए इसे केवल आंकड़ों का मायाजाल करार दिया है।
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में जीतू पटवारी ने मंत्रिमंडल के कई वरिष्ठ सदस्यों की नैतिकता पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने लिखा है कि बजट सत्र में उन मंत्रियों की उपस्थिति अनुचित है जिन पर गंभीर आरोप हैं। पटवारी ने मंत्री विजय शाह पर सेना के अपमान का आरोप लगाया, वहीं छिंदवाड़ा में जहरीली सिरप से हुई बच्चों की मौत के लिए स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला और इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के लिए कैलाश विजयवर्गीय को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने कहा कि ऐसे मंत्रियों का पद पर बने रहना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है।
प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर हमला
बजट सत्र से पहले पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने भी आर्थिक मुद्दों पर सरकार को घेरा है। शर्मा ने दावा किया कि मध्यप्रदेश पर वर्तमान में 5 लाख करोड़ रुपये का भारी कर्ज है, जिससे प्रदेश के प्रत्येक नागरिक पर करीब 60 हजार रुपये का कर्ज भार है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब विभाग अपनी बुनियादी जिम्मेदारियां निभाने में विफल रहे हैं, तो उन्हें बजट देने का क्या औचित्य है। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया है कि आर्थिक तंगी के कारण सरकार ने जनहित से जुड़ी 29 महत्वपूर्ण योजनाएं बंद कर दी हैं।
विरोध प्रदर्शन की तैयारी
कांग्रेस ने आगामी विधानसभा सत्र के दौरान सरकार को सड़क से सदन तक घेरने की रणनीति बनाई है। पीसी शर्मा के अनुसार, प्रदेश के बिगड़ते हालातों के विरोध में किसान कांग्रेस, महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस और एनएसयूआई द्वारा प्रदर्शन किए जाएंगे। पार्टी ने हड़ताल कर रहे विभिन्न कर्मचारी संगठनों और ट्रेड यूनियनों को भी अपना समर्थन देने की घोषणा की है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि आज किसान, युवा और महिलाएं, सभी वर्ग सरकार की नीतियों से परेशान हैं।