ग्रामीण आजीविका का सशक्त माध्यम बन रहा मछली पालन, महिलाओं को मिल रहा आर्थिक स्वावलंबन

विकासखंड भरतपुर में 30 हितग्राहियों को शत-प्रतिशत अनुदान पर जाल उपलब्ध

एमसीबी/11 फरवरी 2026/ जिले में मछली पालन ग्रामीण आजीविका के एक सशक्त और टिकाऊ विकल्प के रूप में तेजी से उभर रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में निर्मित डबरियों, अमृत सरोवरों तथा सिंचाई जलाशयों का उपयोग कर मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं, बल्कि महिलाओं और किसानों को आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में नई मजबूती मिल रही है। एमसीबी जिले के तीनों जनपद पंचायत क्षेत्रों में विगत वर्षों में 780 से अधिक डबरियों का निर्माण किया गया है। इसके अतिरिक्त मिशन अमृत सरोवर अंतर्गत निर्मित 87 अमृत सरोवरों में से चयनित 15 अमृत सरोवरों में इस वर्ष मछली पालन प्रारंभ किया गया है। स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं इस गतिविधि से जुड़कर आय अर्जित कर रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बना रही हैं।


मछली पालन से ग्रामीणों को दोहरा लाभ मिल रहा है। एक ओर यह आय का स्थायी स्रोत बन रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण परिवारों के पोषण स्तर में भी सुधार हो रहा है। गांवों में आजीविका डबरी निर्माण की मांग निरंतर बढ़ रही है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। वहीं वर्ष 2024-25 के दौरान मनरेगा योजना अंतर्गत निर्मित 500 डबरियों में मत्स्य विभाग द्वारा किसानों को अनुदान पर मत्स्य बीज उपलब्ध कराया गया। इसी प्रकार वर्ष 2025-26 में 300 डबरियों तथा 15 अमृत सरोवरों में मत्स्य बीज (फिंगरलिंग) वितरण कर मत्स्य पालन को प्रोत्साहित किया गया। इस पहल से ग्रामीणों को स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त हुए हैं।
विकासखंड भरतपुर में 30 हितग्राहियों को शत-प्रतिशत अनुदान पर मछली पकड़ने के जाल उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे उत्पादन और आय में वृद्धि की संभावनाएं बढ़ी हैं। इसके साथ ही जिले के सिंचाई जलाशयों में भी मत्स्य पालन की व्यापक संभावनाओं को साकार किया जा रहा है।विकासखंड खडगवा के 62 हेक्टेयर रकबे वाले बरदर सिंचाई जलाशय में मधुना सहकारी समिति के 9 हितग्राहियों द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत 162 केज स्थापित कर मत्स्य पालन प्रारंभ किया गया है। इस पहल से रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं तथा आय में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना बनी है। मछली के परिवहन एवं विपणन को सुदृढ़ बनाने हेतु 20 किसानों को आइस बॉक्स भी वितरित किए गए हैं, जिससे उपभोक्ताओं को ताज़ी मछली उपलब्ध कराई जा रही है। जिले में वर्तमान में 15 मछुआ सहकारी समितियां सक्रिय रूप से कार्यरत हैं, जिन्हें शासन की समृद्धि योजना के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के लाभ प्रदान किए जा रहे हैं। वर्ष 2024-25 में विकासखंड खडगवा के उधनापुर सिंचाई जलाशय की मछुआ सहकारी समिति को अनुदान पर एक फाइबर बोट प्रदान की गई, जिससे मत्स्य उत्पादन और संग्रहण कार्य में सुविधा हुई तथा समिति की आय में वृद्धि सुनिश्चित हुई। जिले की अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियां, जल संसाधनों की उपलब्धता तथा विभागीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन मछली पालन को एक लोकप्रिय और लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित कर रहा है। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही है और विशेष रूप से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर कर रही है।

समाचार क्रमांक/50/लोकेश/फोटो 04 से 06

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