वह मौन प्रहरी मुस्कुरा रहा है इस तरह’

पर कोपरा जलाशय पर अभी भी समुचित ध्यान नहीं

राजकुमार मल

भाटापारा- मुस्कुरा रहा है जैव विविधता का मौन प्रहरी कोपरा जलाशय क्योंकि संकटग्रस्त पक्षियों और मछलियों को और भी अधिक सुरक्षित आश्रय स्थल मिलेगा। कमल, सिंघाड़ा और ऐसे जलीय पौधों को भी विस्तार का अवसर मिलने जा रहा है, जो जल प्रदूषण दूर करते हैं और कार्बन अवशोषण करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कोपरा जलाशय। निर्माण एक निश्चित उद्देश्य से हुआ था लेकिन बदलते समय के साथ इसने एक जीवंत आर्द्र भूमि का स्वरूप ग्रहण कर लिया। वर्षा जल, सतही अपवाह और आसपास के हरित क्षेत्र के प्रभाव से एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हुआ है, जिसमें जल, मिट्टी, वनस्पति और जीव-जंतु परस्पर संतुलन बनाए रखते हैं। यही संतुलन इसे सामान्य जलाशय से अलग बनाता है।


उच्च प्रजातीय समृद्धि से भरपूर

कोपरा जलाशय का तटीय क्षेत्र ड्रैगनफ्लाई एवं उनके प्रजनन के लिए उपयुक्त आवास प्रदान करता है। मछलियां संपूर्ण जलीय क्षेत्र में पाई जाती हैं। जिनकी प्रजातियां जल की गहराई और वनस्पति आवरण के अनुसार भिन्न-भिन्न होतीं हैं। दुर्लभ एवं संकटग्रस्त प्रजातियों के साथ-साथ विकासात्मक महत्व वाली प्रजातियों की उपस्थिति इसे विशिष्ट बनाती है।


वनस्पति, सरीसृप और उभयचरों से समृद्ध

यह आर्द्र भूमि 176 प्रजातियों की स्थलीय वनस्पतियों, 64 प्रजातियों की मेेकोफाइट्स, 30 प्रजातियों की प्राकृतिक और संवर्धित मछलियां तथा 13 प्रजातियों के सरीसृप एवं उभयचर को अपना समर्थन देती है। महत्वपूर्ण यह भी कि कोपरा जलाशय जल पक्षियों के लिए एक ऐसा आदर्श एवं महत्वपूर्ण स्थल है, जहां 149 प्रजातियों के पक्षियों का जीव जगत पाया जाता है। इनमें स्थानीय और प्रवासी दोनों प्रजातियां शामिल है।


ऐसा है कोपरा जलाशय

कोपरा जलाशय, जिले के तखतपुर विकासखंड में स्थित है। समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 287 से 295 मीटर के बीच है। यह जलाशय महानदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र का भाग है। जलाशय की कुल लंबाई 1680 मीटर है। इसका जल भंडारण आयतन एक लाख तेरह हजार घन मीटर और कुल क्षेत्रफल 210 हेक्टेयर है।

कोपरा जलाशय : संरक्षण से समृद्धि की ओर

कोपरा जलाशय एक साधारण जल संरचना न होकर विकसित होती हुई समृद्ध आर्द्रभूमि है। इसकी जैव विविधता, विशेषकर संकटग्रस्त पक्षी, मछलियाँ और जलीय वनस्पतियाँ, इसे पारिस्थितिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती हैं। उचित संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से कोपरा जलाशय को जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन का एक आदर्श मॉडल बनाया जा सकता है।

अजीत विलियम्स, साइंटिस्ट (फॉरेस्ट्री), बीटीसी कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर

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