नई दिल्ली | 07 फरवरी, 2026 : किसी भी राष्ट्र के विकास में उसके कर्मचारियों का योगदान सबसे अहम होता है। इसी सिद्धांत को आधार बनाकर 8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission) अब एक ‘पीपुल्स पार्टिसिपेशन’ (जन-भागीदारी) मॉडल पर काम कर रहा है। आयोग ने MyGov पोर्टल के जरिए केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों से उनकी राय मांगी है, ताकि एक ऐसा वेतन ढांचा तैयार किया जा सके जो न केवल आर्थिक रूप से व्यावहारिक हो, बल्कि सामाजिक और मानवीय न्याय के मापदंडों पर भी खरा उतरे।
वेतन नहीं, यह ‘जीवन स्तर’ का सवाल है
आयोग ने जो 18 सवालों की प्रश्नावली जारी की है, उसका मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि आज की महंगाई और बदलती अर्थव्यवस्था में एक सरकारी सेवक और उसके परिवार के लिए ‘सम्मानजनक जीवन’ के मायने क्या हैं। इसमें फिटमेंट फैक्टर और इंक्रीमेंट जैसे तकनीकी शब्दों के पीछे असली मकसद क्रय शक्ति (Purchasing Power) को बनाए रखना है, ताकि रिटायरमेंट के बाद भी किसी बुजुर्ग पेंशनभोगी के मानवाधिकारों (जैसे स्वास्थ्य और भोजन) का हनन न हो।
लोकतांत्रिक प्रक्रिया: आपकी पहचान रहेगी गोपनीय
मानवाधिकारों की सुरक्षा का एक बड़ा हिस्सा ‘निजता का अधिकार’ है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि सुझाव देने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था की पहचान सार्वजनिक नहीं की जाएगी। इससे कर्मचारी बिना किसी डर के अपनी वास्तविक आर्थिक स्थिति और जरूरतों को सरकार के सामने रख सकेंगे।
इन प्रमुख पहलुओं पर केंद्रित है फीडबैक:
समानता का अधिकार: क्या अलग-अलग वेतन स्तरों पर इंक्रीमेंट और भत्तों में भेदभाव कम होना चाहिए?
आर्थिक सुरक्षा: क्या मौजूदा फिटमेंट फैक्टर बढ़ती महंगाई के बीच परिवार की बुनियादी जरूरतों के लिए पर्याप्त है?
वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान: पेंशनरों के लिए बेहतर चिकित्सा और आर्थिक प्रावधानों पर सुझाव।
16 मार्च तक का समय: न्याय सुनिश्चित करने का मौका
8वें वेतन आयोग की इस पहल को ‘आर्थिक लोकतंत्र’ की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। सभी हितधारकों के पास 16 मार्च 2026 तक का समय है कि वे अपनी बात सरकार तक पहुँचाएं। याद रहे, यह केवल एक सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि लाखों कर्मचारियों के आर्थिक अधिकारों को सुरक्षित करने का एक मंच है।