भिलाई। नाबालिग बालिका के साथ लंबे समय तक दुष्कर्म एवं सामूहिक दुष्कर्म के गंभीर मामले में दुर्ग पुलिस को अहम सफलता हाथ लगी है। महिला थाना दुर्ग पुलिस ने प्रकरण में फरार चल रहे मुख्य आरोपी कृपा शंकर उर्फ राजू कश्यप को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को अभिरक्षा में लेकर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है तथा उसे शीघ्र ही सक्षम न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 30 जनवरी 2026 को पीड़िता अपनी माता के साथ महिला थाना दुर्ग पहुंची और लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उल्लेख किया गया कि अप्रैल 2018 से अक्टूबर 2025 के मध्य, पीड़िता के नाबालिग होने की जानकारी होने के बावजूद कुल छह आरोपियों द्वारा उसके साथ बार-बार दुष्कर्म एवं सामूहिक दुष्कर्म की घटनाएं कारित की गईं।
पीड़िता की रिपोर्ट पर महिला थाना दुर्ग में विधिवत अपराध क्रमांक पंजीबद्ध कर धारा 65(1), 70(2) बीएनएस तथा POCSO अधिनियम की धारा 6 एवं 12 के अंतर्गत अपराध कायम कर विवेचना प्रारंभ की गई। विवेचना के दौरान पुलिस द्वारा तत्परता से कार्रवाई करते हुए पूर्व में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
इसी क्रम में प्रकरण में लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी कृपा शंकर उर्फ राजू कश्यप (58 वर्ष), निवासी सेक्टर-05, सड़क-09, भिलाई तथा मूल निवासी राम लखनपार, थाना बड़हलगंज, जिला गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) को 07 फरवरी 2026 को दोपहर 1:25 बजे प्रकरण से संबंधित साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के अनुसार, मामले में शेष आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है तथा विवेचना को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है। जांच के दौरान इलेक्ट्रॉनिक एवं अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य भी प्राप्त हुए हैं, जिनका परीक्षण किया जा रहा है।
अब तक गिरफ्तार आरोपी
विजय स्वाइन (37), निवासी दुर्गा नगर पश्चिम, भिलाई
अनिल चौधरी (60), निवासी ज़ोन-01, खुर्शीपार
गोविंद सिंह नागवंशी (62), निवासी चौकड़िया पारा, वार्ड 35, जिला राजनांदगांव
कृपा शंकर उर्फ राजू कश्यप (58), निवासी भिलाई गोरखपुर (उ.प्र.) निवासी है l
इस संवेदनशील प्रकरण में महिला थाना दुर्ग एवं ACCU दुर्ग की विवेचना टीम द्वारा गंभीरता, संवेदनशीलता एवं त्वरित कार्रवाई करते हुए की गई वैधानिक कार्यवाही सराहनीय रही।
पुलिस की अपील
दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि इस प्रकार के गंभीर एवं संवेदनशील अपराधों की जानकारी बिना संकोच तत्काल पुलिस को दें। पीड़ितों की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाती है तथा दोषियों के विरुद्ध कठोरतम वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।