नई दिल्ली। भारत और अमेरिका ने एक अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक फ्रेमवर्क पेश किया है, जिसके तहत अमेरिकी टैरिफ को भारतीय सामानों पर 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है।
संयुक्त बयान के अनुसार, इस समझौते में भारत के कृषि बाजार को सुरक्षित रखा गया है। भारत ने उन कृषि और डेयरी उत्पादों पर कोई छूट नहीं दी है, जिन्हें वह संवेदनशील मानता है। यह अंतरिम समझौता भारत और अमेरिका दोनों के लिए व्यापक व्यावसायिक लाभ लेकर आता है, साथ ही भारत अपनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा।
पीयूष गोयल का बयान
भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पर कहा, “यह समझौता भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो किसानों के हितों की रक्षा करने और ग्रामीण आजीविका को बनाए रखने के लिए कृषि और डेयरी उत्पादों पर विशेष ध्यान देता है। इसमें मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पोल्ट्री, दूध, पनीर, इथेनॉल (ईंधन), तंबाकू, कुछ सब्जियां और मांस जैसी संवेदनशील वस्तुएं पूरी तरह से सुरक्षित रखी गई हैं।”
एग्रीकल्चर सेक्टर में अमेरिकी उत्पादों का प्रभाव
भारत के पारंपरिक अनाज और दुग्ध उत्पाद करने वाले किसानों को अब अमेरिकी उत्पादों से प्रतिस्पर्धा का खतरा नहीं रहेगा। गेहूं, चावल, दूध, पनीर, केला और अन्य फलों के आयात पर कोई छूट नहीं दी गई है। हालांकि, पशुचारा, अमेरिकी शराब, सोयाबीन तेल और अन्य फलों का आयात बढ़ेगा, क्योंकि इनकी बाधाएं भारत सरकार द्वारा दूर की जाएंगी।
भारत के खाद्य स्रोत पूरी तरह से सुरक्षित
इस समझौते के तहत भारत के विभिन्न खाद्य स्रोतों को पूरी तरह से सुरक्षित रखा गया है, जिनमें शामिल हैं:
- अनाज: चौलाई, रागी, गेहूं, बाजरा, मक्का, चावल, ज्वार, कुट्टू बाजरा, कंगनी, जई, और बिना पॉलिश वाले अनाज।
- डेयरी उत्पाद: दूध, पनीर, क्रीम मक्खन, घी, दही, छाछ, मट्ठा उत्पाद।
- सब्जियां और दालें: फ्रोजन सब्जियां, आलू, मटर, बीन्स, अन्य दालें, खीरा, मशरूम, अचार वाली खीरा, और अस्थायी रूप से संरक्षित सब्जियां।
इस समझौते के साथ, भारत ने अपने कृषि और खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करते हुए एक मजबूत व्यापारिक साझेदारी का रास्ता खोला है।