लिमगांव शिक्षक घोटाला की जांच में लापरवाही पर DEO सख्त, टालमटोल कर रहे अधिकारियों को दी अंतिम चेतावनी


दिलीप गुप्ता
सरायपाली :- लिमगांव स्कूल मामला अब जोर पकड़ते जा रहा है । जांच अधिकारियों द्वारा विभिन्न कारणों का उल्लेख करते हुवे जांच नहीं करने व उनके स्थान पर किन्ही उच्च अधिकारियों से जांच किए जाने से संबंधित पत्र अपने जांच आदेश कर्ता अधिकारी डीईओ को पत्र दिए जाने के बाद इसे डीईओ द्वारा गंभीरता से लेते हुवे दूसरी बार जांच कर जांच रिपोर्ट पेश किये जाने हेतु पुनः पत्र लिखा गया है । इस सम्बन्ध में विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इन कथित जांच कर्ताओं द्वारा आदेश का पालन नहीं किये जाने की स्थिति में अनुशासन हीनता बरतने जैसी कार्यवाही हो सकती है । डीईओ द्वारा पुनः जांच आदेश जारी किये जाने से यह संभावना प्रबल होती जा रही है कि इस मामले में जांच अधिकारियों के पीछे हटने के पीछे कोई बड़ा खेल है व आपसी मिलीभगत से एक दूसरे को बचाए जाने का प्रयास किया जा रहा है । वहीं अपने उच्च अधिकारियों के आदेश की अवहेलना के आरोप में अभी तक इन जांच कर्ताओं के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी होने के साथ साथ अनुशासनहीनता , शासकीय आदेश मानने से इनकार करना , गलत व झूठे कारण बताने से जांच से इनकार करने जैसे गंभीर आरोपों को देखते हुवे विभाग को सख्त कार्यवाही करनी चाहिए ।

ज्ञातव्य हो कि शासकीय मिडिल स्कूल लिमगांव में लकवाग्रस्त प्रधानपाठक की अनुपस्थिति में अनधिकृत शिक्षक से पढ़ाई कराए जाने के गंभीर मामले में जांच को लेकर शिक्षा विभाग के भीतर खींचतान खुलकर सामने आ गई है। जिला शिक्षा अधिकारी, महासमुंद ने जांच कार्य में जानबूझकर विलंब और आदेशों की अवहेलना को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को कड़ी चेतावनी जारी करते हुवे पुनः पत्र क्रमांक 714/ शिकायत/जांच/2026 दिनांक 4/2/26 को चारों जांच अधिकारियों को पत्र जारी किया गया है ।

प्राप्त जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता विनोद कुमार दास द्वारा फरवरी 2025 में शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि विद्यालय में एक वर्ष से अधिक समय तक शिक्षक अनुपस्थित रहा, इसके बावजूद मानदेय लेकर अन्य व्यक्ति से शिक्षण कार्य कराया गया। इस पर 3 नवंबर 2025 को विकासखंड स्तरीय जांच दल गठित किया गया, किंतु तीन माह बीत जाने के बाद भी जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया।

जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा 04 फरवरी को पुनः आदेश जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि जांच में देरी का कोई वैध कारण नहीं है। न ही किसी प्रकार का राजनीतिक दबाव स्वीकार्य है। पत्र में यह भी उल्लेख है कि जांच में टालमटोल से विभाग की छवि धूमिल हो रही है। ऐसे में यदि शीघ्र जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध उच्च कार्यालय को अनुशासनात्मक कार्रवाई हेतु पत्र प्रेषित किया जाएगा।

इधर, 29 जनवरी को विकासखंड शिक्षा अधिकारी बसना द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर यह स्वीकार किया गया है कि जांच के दौरान राजनीतिक पार्टी के नेताओं का दबाव की स्थिति बनी हुई है और निष्पक्ष जांच कर पाना संभव नहीं हो पा रहा। पत्र में विकासखंड स्तरीय जांच टीम को निरस्त कर जिला या उच्च स्तरीय जांच टीम गठित करने की मांग की गई है।

इससे पूर्व भी 22 जनवरी को बीईओ बसना बद्रीविशाल जोल्हे ने लोकेश्वर सिंह कंवर एबीइओ, अनिल सिंह साव बीआरसीसी, क्षीरोद्र पुरोहित प्राचार्य आत्मानंद स्कूल के संयुक्त हस्ताक्षर से एक चिट्ठी डीईओ महासमुंद को लिखकर अवगत कराया था। इस पूरे घटनाक्रम ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जिला स्तर पर चेतावनी के बाद जांच निष्कर्ष तक पहुंचती है या फाइलों में ही उलझी रह जाती है ।
ज्ञातव्य हो कि “आज की जनधारा” द्वारा लगातार समाचार प्रकाशन के लिमगांव स्कूल जांच मामले को आम पाठकों व संबंधित अधिकारियों तक पहुंचा रहा है ।

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