सूर्य से निकली शक्तिशाली सोलर फ्लेयर्स ने बढ़ाई चिंता, इसरो ने सैटेलाइट और संचार प्रणालियों के लिए जारी की चेतावनी

बेंगलुरु। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सूर्य से निकलने वाली तीव्र सौर ज्वालाओं (सोलर फ्लेयर्स) को लेकर चेतावनी जारी की है। फरवरी 2026 की शुरुआत में सूर्य की सतह पर कई बड़े विस्फोट दर्ज किए गए हैं, जिनमें 1 फरवरी को हुआ X8.1 क्लास का विस्फोट सबसे शक्तिशाली है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह इस दशक की सबसे तीव्र सौर गतिविधियों में से एक है।

सौर फ्लेयर सूर्य की सतह पर चुंबकीय ऊर्जा के अचानक मुक्त होने से पैदा होने वाला विस्फोट है। वर्तमान में सूर्य अपनी 25वीं सौर चक्र अवधि के चरम (सोलर मैक्सिमम) पर है, जिस कारण ऐसी घटनाएं अधिक हो रही हैं। इन विस्फोटों से निकलने वाली एक्स-रे और अल्ट्रावायोलेट किरणें प्रकाश की गति से अंतरिक्ष में फैलती हैं, जिसका सीधा असर पृथ्वी के वायुमंडल और संचार प्रणालियों पर पड़ता है।

इसरो के वैज्ञानिकों के अनुसार, इन फ्लेयर्स के कारण उच्च फ्रीक्वेंसी रेडियो सिग्नल बाधित हो सकते हैं, जिससे संचार में समस्या आ सकती है। इसके अलावा, जीपीएस और नेविगेशन प्रणालियों की सटीकता भी प्रभावित होने की आशंका है। इससे विमानन और समुद्री क्षेत्रों में उपयोग होने वाले उपकरणों में थोड़ी देर के लिए रुकावट आ सकती है। इसरो वर्तमान में अपने 50 से अधिक सक्रिय सैटेलाइट्स की निरंतर निगरानी कर रहा है ताकि किसी भी संभावित खतरे से बचा जा सके।

भारत का आदित्य L1 मिशन इस सौर गतिविधि की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। L1 पॉइंट पर तैनात यह यान स्पेस वेदर की जानकारी पहले ही उपलब्ध करा देता है, जिससे वैज्ञानिकों को सुरक्षात्मक कदम उठाने का समय मिल जाता है। हालांकि, इन फ्लेयर्स का सामान्य जनजीवन और रोजमर्रा के इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों पर कोई सीधा खतरा नहीं है। केवल ध्रुवीय और अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रेडियो या जीपीएस संचार में क्षणिक व्यवधान देखने को मिल सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक सूर्य का सक्रिय क्षेत्र पृथ्वी की दिशा में रहेगा, तब तक ऐसे और विस्फोटों की संभावना बनी रहेगी। इसरो और अन्य अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसियां मिलकर इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि समय रहते आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जा सकें।

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