रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य के युवाओं और उद्यमियों के हित में बड़ा फैसला लिया गया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य को नवाचार के केंद्र के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ नवाचार एवं स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति 2025-30 को अपनी स्वीकृति दे दी है। इस नीति का मुख्य लक्ष्य अमृतकाल छत्तीसगढ़ विजन 2047 के संकल्पों को पूरा करना और प्रदेश में निवेश के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर सृजित करना है।
राज्य में अब तक स्टार्टअप के लिए कोई पृथक नीति नहीं थी, जिससे इन्क्यूबेशन और निवेश को अपेक्षित गति नहीं मिल पा रही थी। नई नीति के तहत अब स्टार्टअप्स को मजबूत वित्तीय आधार देने के लिए 100 करोड़ रुपये का छत्तीसगढ़ स्टार्टअप कैपिटल फंड बनाया जाएगा। इसके अलावा, शुरुआती दौर के स्टार्टअप्स को अपना उत्पाद विकसित करने के लिए 10 लाख रुपये तक का सीड फंड देने का प्रावधान किया गया है। स्टार्टअप्स को बैंकों से बिना गारंटी के एक करोड़ रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराने के लिए 50 करोड़ रुपये का क्रेडिट रिस्क फंड भी स्थापित किया जाएगा।
शिक्षा और रोजगार को जोड़ने के लिए इस नीति में विशेष प्रोत्साहन दिए गए हैं। दस से अधिक स्थायी रोजगार देने वाले स्टार्टअप्स को प्रति कर्मचारी मासिक सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही दिव्यांगों, सेवानिवृत्त अग्निवीरों और नक्सल प्रभावित व्यक्तियों को नौकरी देने वाले स्टार्टअप्स को उनके वेतन का 40 प्रतिशत अनुदान पांच वर्षों तक मिलेगा। महिला उद्यमियों और कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के लिए भी नीति में विशेष वित्तीय लाभ जोड़े गए हैं।
नई नीति में स्टार्टअप्स को सरकारी खरीद में प्राथमिकता, स्टाम्प शुल्क में छूट और किराये के भवनों में संचालित इकाइयों को तीन वर्षों तक किराया अनुदान देने का भी निर्णय लिया गया है। अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भाग लेने और डिजिटल विज्ञापनों पर होने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति भी शासन द्वारा की जाएगी। सरकार का मानना है कि इस नीति से छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत स्टार्टअप राज्य बनकर उभरेगा और स्थानीय युवाओं को उद्यमिता के क्षेत्र में वैश्विक पहचान मिलेगी।