मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर प्रशासनिक अव्यवस्थाओं पर उठाए सवाल
कोयलीबेड़ा/कांकेर।
उत्तर बस्तर कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा ब्लॉक मुख्यालय की वर्षों से लंबित मूलभूत समस्याओं को लेकर मंगलवार को क्षेत्र में जनआक्रोश देखने को मिला। ग्राम पंचायतों के सरपंचों, जनप्रतिनिधियों, किसानों, विद्यार्थियों एवं आम नागरिकों ने रैली निकालकर तहसील कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन के नाम तहसीलदार कोयलीबेड़ा को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से प्रशासनिक, शैक्षणिक, स्वास्थ्य एवं बैंकिंग सुविधाओं की गंभीर अव्यवस्थाओं को उजागर किया गया।
लिंक कार्यालय व्यवस्था से जनता परेशान
ज्ञापन में बताया गया कि कोयलीबेड़ा ब्लॉक मुख्यालय वर्ष 1962 से संचालित है, लेकिन वर्ष 2002 में जनपद पंचायत कार्यालय पखांजूर स्थानांतरित किए जाने के बाद अधिकांश शासकीय विभागों का संचालन लिंक कार्यालय पखांजूर से किया जा रहा है। इससे ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिल पा रहा है। आदिवासी बहुल क्षेत्र होने के बावजूद प्रशासनिक सुविधाओं का केंद्रीकरण अन्यत्र किए जाने से जनता को अनावश्यक रूप से दूर-दराज भटकना पड़ रहा है।
शिक्षा से वंचित हो रहे सैकड़ों विद्यार्थी
उच्च शिक्षा संस्थान के अभाव में क्षेत्र के सैकड़ों छात्र-छात्राओं को 40 से 50 किलोमीटर दूर जाकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। आर्थिक कमजोरी और आवागमन की समस्या के चलते कई विद्यार्थी शिक्षा छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। ग्रामीणों ने कोयलीबेड़ा में महाविद्यालय की स्थापना की मांग दोहराई।
बैंकिंग सुविधा नहीं, किसान हलाकान
जिला सहकारी बैंक शाखा नहीं होने के कारण किसानों को पखांजूर या अंतागढ़ जाना पड़ता है। सप्ताह में केवल एक दिन लेन-देन होने से घंटों लाइन में खड़े रहने के बावजूद किसानों का काम पूरा नहीं हो पाता। शाम के समय वापसी के लिए बस सुविधा नहीं मिलने से किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
स्वास्थ्य सेवाओं की हालत चिंताजनक
ब्लॉक मुख्यालय में स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल स्थिति में हैं। केवल एक डॉक्टर के भरोसे पूरा क्षेत्र है। नया अस्पताल भवन होने के बावजूद आवश्यक संसाधन, स्टाफ और समय पर एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिससे मरीजों को पखांजूर व कांकेर रेफर किया जाता है।
कृषि विभाग पर लापरवाही के आरोप
ज्ञापन में कृषि विभाग के कर्मचारियों पर नियमित रूप से मुख्यालय में उपस्थित न रहने, खाद-बीज वितरण में लापरवाही और पंचायतों में सामग्री वितरण में अनियमितता के आरोप लगाए गए। साथ ही धान खरीदी की तिथि बढ़ाने की मांग भी रखी गई।
ये हैं प्रमुख मांगें
- ब्लॉक मुख्यालय के समस्त कार्यालयों का संचालन कोयलीबेड़ा से किया जाए।
- जिला सहकारी बैंक शाखा की स्थापना की जाए।
- महाविद्यालय खोला जाए।
- अस्पताल में डॉक्टर व स्टाफ की कमी दूर की जाए।
- धान खरीदी की तिथि बढ़ाई जाए।
- दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाए।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। ज्ञापन पर अनेक ग्राम पंचायतों के सरपंचों, जनपद सदस्यों एवं सामाजिक संगठनों के हस्ताक्षर दर्ज हैं।