भिलाई में शबे बराअत की तैयारियां मुकम्मल; 3 फरवरी को मस्जिदों और कब्रिस्तानों में होगी खास इबादत और दुआएं

रमेश गुप्ता
भिलाई। शबे बराअत के मौके पर 3 फरवरी को शहर का मुस्लिम समुदाय मस्जिदों, घरों और कब्रिस्तान में खास इबादत करेगा। दुआओं का यह सिलसिला मंगलवार 3 फरवरी को सुबह से शुरू होगा जो देर रात तक जारी रहेगा। कब्रिस्तान हैदरगंज इंतेजामिया कमेटी कैम्प-1 की ओर से इस मौके पर कई आयोजन रखे गए हैं। वहीं तमाम जरूरी तैयारियां कर ली गई हैं। शहर की तमाम मस्जिदों में शानदार रोशनी की गई है।
कब्रिस्तान हैदरगंज के हॉल में रविवार सुबह 7:30 बजे से कुरआन ख्वानी व दुरूद ख्वानी का सिलसिला शुरू होगा। इसके बाद सुबह 10 बजे फातिहाख्वानी और इज्तेमाई दुआएं होगी। शाम को जलसे की शुरूआत तकरीर व नात से होगी। यहां कब्रिस्तान हैदरगंज में रात तकरीबन 09:30 बजे इमाम ए आज़म अबू हनीफा कॉन्फ्रेंस व महफिल ए शबे बराअत होगी, जिसमें मेहमान ए खुसूसी सैयद मुहम्मद महमूद अशरफ अशरफी अल जीलानी किछौछा शरीफ उत्तर प्रदेश होंगे।

शाम की नमाज में भी होगी खास इबादत

शहर की तमाम मस्जिदों में शबे बराअत पर शाम की नमाज (मगरिब) के बाद तीन मरतबा सूरए यासीन शरीफ सुनाया जाएगा और लोग 2-2 रकअत के साथ नफिल नमाज पढ़ेंगे। इसके बाद दुआएं की जाएगी। जामा मस्जिद सेक्टर-6 में शाम को मगरिब की नमाज के ठीक बाद सूरए यासीन सुना जाएगा और लोग नफिल नमाज पढ़ेंगे। शहर की दूसरी मस्जिदों में भी यह आयोजन होगा।

कब्रिस्तान में किए गए जरूरी इंतजाम

भिलाई नगर मस्जिद ट्रस्ट के मातहत हैदरगंज कब्रिस्तान इंतजामिया कमेटी ने शबे बराअत को देखते हुए तैयारी पूरी कर ली गई है। जिसमें कब्रिस्तान की साफ सफाई करवाई गई है और चारों तरफ रोशनी के इंतजाम किए गए हैं। जिससे लोगों को अपने दिवंगत परिजनों की कब्र तक पहुंचने में सहूलियत हो। वज़ू के पानी के लिए बोरिंग और पानी की बड़ी टंकी का इंतजाम किए गए हैं। वहीं पूरे कब्रिस्तान की दीवारों और मज़ार के साथ साथ, जनाज़े की नमाज़ और दीनी प्रोग्राम के लिए बनाए गए डोम शेड व गोरकुन के घर की भी रंग रोगन करवाई गई है।

गुनाहों से बरी होने की रात है शबे बराअत: मौलाना इकबाल

शबे बराअत के आयोजन के बारे में जामा मस्जिद सेक्टर-6 के इमामो खतीब मौलाना मोहम्मद इकबाल अंजुम हैदर अशरफी जामई ने बताया कि शब के मायने रात और बराअत के मायने बरी होने से है। शबे बराअत की रात बहुत बरकतों वाली और अल्लाह को राजी करने वाली होती है। हदीस में आया है कि पैगम्बर हजरत मोहम्मद (सअव) शबे बराअत में सऊदी अरब के जन्नतुल बकी (एक कब्रिस्तान) में जा कर दुआएं करते थे। उन्ही के रास्ते पर चलते हुए लोग शबे बराअत पर कब्रिस्तान जाकर अपने मरहूम (दिवंगत)परिजनों की कब्र पर दुआएं करते हैं। मौलाना अशरफी ने कहा कि यही वह रात है जब अल्लाह तआला रहमत के 300 दरवाजे खोल देता है और हर उस शख्स को बख्श देता है जिसने उसके साथ किसी को शरीक नहीं ठहराया है। उन्होंने कहा कि इस रात लोग अपने तमाम छोटे-बड़े गुनाहों पर शर्मिंदा होकर अल्लाह की बारगाह में तौबा करें तो उसकी तौबा जरूर कुबूल होती है।

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