राजकुमार मल
भाटापारा- कार्यालय से लेकर कार्यक्रम तक के हर चरण में उपेक्षा का दंश झेलने के लिए विवश है शहर भाटापारा। ‘कुछ नहीं होगा इस शहर में… ‘ जैसा एक छोटा सा वाक्य फिर से स्वतंत्र जिले की मांग को पूरी मजबूती के साथ सामने ला रहा है।
दावे विकास के विकास पुरुषों ने खूब किए। अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाई जाएंगी शासकीय योजनाएं..जैसे सरकारी नारे भी खूब सुने गए। नाराज है भाटापारा, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के आला अधिकारियों से क्योंकि बड़े आयोजन तो दूर, जिला स्तर का एक कार्यालय भी देने में ये दोनों असमर्थ साबित हुए है।
सिर्फ घोषणा
जिला गठन के बाद पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के तरेंगा की सभा व पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कड़ार की सभा में जनता व कार्यकर्ता की मांग में घोषणा की थी कि भाटापारा में अतिरिक्त जिलाधीश की व्यवस्था की जायेगी भवन बना, जरूरी संसाधन पहुंचाए गए लेकिन नहीं आए अतिरिक्त जिलाधीश ।
एहसास छले जाने का
जनप्रतिनिधियों का रहस्यमई मौन और प्रशासनिक अधिकारियों की उपेक्षा तब सामने आती है, जब जिला स्तर के कार्यालयों और आयोजनों से शहर को दूर रखा जाता है। योग्यता रखता है भाटापारा भी जिला स्तर के शासकीय आयोजनों की लेकिन जनप्रतिनिधियों के बाद प्रशासनिक अधिकारी भी जमकर उपेक्षा कर रहें हैं भाटापारा की। यह सब स्थितियां स्वतंत्र जिले की मांग को फिर से उठाने के लिए जमीन तैयार कर रहीं हैं।