पलाश के फूलने और फलने के लिए मौसम है अनुकूल…लगने लगीं कलियां

राजकुमार मल

भाटापारा- ‘फ्लेम ऑफ़ फाॅरेस्ट’। सामान्य से कुछ ज्यादा फैलाव ले सकता है क्योंकि शीत ऋतु के दिन सूखे जा रहे हैं। मौसम का यह तेवर पुष्प और बीज का उत्पादन बढ़ने का संकेत दे रहा है।

2026 में पलाश में पुष्पन और फलन का पूर्वानुमान वानिकी वैज्ञानिकों ने जारी कर दिया है। यह पूर्वानुमान बता रहा है कि इस वर्ष फूल और फल का उत्पादन सामान्य से बेहतर रहेगा। इस पूर्वानुमान के बाद रंग- गुलाल के बाजार में पलाश से बनने वाले प्राकृतिक रंग की कीमत में हल्की तेजी आने लगी है।


लग रहीं कलियां

जनवरी से मार्च के बीच होने वाली वर्षा इस बार सामान्य से काफी कम होगी। यह स्थिति शांत और सूखी सर्दी जैसा मौसम बना रही है। पत्तियां जल्द गिरेंगी, कलियां शीघ्र लगेंगी। परागण करने वाले कीटों का मंडराना भी समय से पहले देखा जाएगा। इसलिए फूलों का उत्पादन बढ़ने की संभावना को बल मिल रहा है।


इसलिए भी धारणा बेहतर की

दिन की बढ़ती समयावधि प्रकाश के घंटे भी बढ़ा रही है। यह नया बदलाव लगती कलियों की संख्या में बढ़ोतरी जैसी स्थिति बना चुकी है। इससे तय समय से पहले पुष्पन की धारणा वानिकी वैज्ञानिकों ने व्यक्त की है। पुष्पन की संभावित यह स्थिति फलन की संख्या और बीज उत्पादन को भी बढ़ाएगी।


तापमान दे रहा साथ

चल रहा तापमान फरवरी, मार्च और अप्रैल में आगे और बढ़ेगा। यह पुष्पन और फलन की गति को और भी बढ़ाएगा। इससे फूलों का उत्पादन तो बढ़ेगा लेकिन लगने वाले फलों में बीज की संख्या एक या दो पर ही स्थिर रहने की धारणा को मजबूत बना रही है। याने बीज का उत्पादन सामान्य बना रहेगा।

सामान्य से बेहतर रहेगा उत्पादन

इस वर्ष शीत ऋतु अपेक्षाकृत शुष्क रहने और तापमान में क्रमिक वृद्धि के कारण पलाश में समय से पहले कलियां लगने और पुष्पन की स्पष्ट संभावना बन रही है। कम वर्षा, बढ़ते प्रकाश घंटे और अनुकूल तापमान परागण क्रियाओं को प्रोत्साहित करेंगे, जिससे फूलों और फलों का उत्पादन सामान्य से बेहतर रहने की उम्मीद है। हालांकि फलों में बीजों की संख्या जैविक कारणों से सीमित रहेगी, फिर भी समग्र रूप से यह वर्ष पलाश के लिए अनुकूल माना जा सकता है।

अजीत विलियम्स, साइंटिस्ट (फॉरेस्ट्री), बीटीसी कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चर रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर

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