उद्योग का दर्जा बना गेमचेंजर: छत्तीसगढ़ पर्यटन में 500 करोड़ से ज्यादा का निवेश, दो साल में ऐतिहासिक उपलब्धियां

रायपुर। छत्तीसगढ़ के पर्यटन, संस्कृति और पुरातत्व विभाग ने बीते दो वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति करते हुए प्रदेश को पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाई है। विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव ने बताया कि पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने के बाद राज्य में 500 करोड़ रुपए से अधिक का निजी निवेश आया है, जिससे इस क्षेत्र में तेज़ी से विकास हुआ है।

छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य के साथ आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. यादव ने बताया कि श्रीरामलला दर्शन योजना के तहत 50 विशेष ट्रेनों के माध्यम से 42,500 से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या दर्शन का लाभ मिला। वहीं, करीब 20 साल बाद दिल्ली में आयोजित रोड शो के जरिए राष्ट्रीय पर्यटन मंचों पर छत्तीसगढ़ की सशक्त वापसी हुई।

उन्होंने बताया कि होमस्टे नीति 2025–30 के माध्यम से ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा मिला है, जिससे स्थानीय लोगों की आजीविका सशक्त हुई है। पर्यटन व्यवसाय पंजीकरण में 10 गुना वृद्धि दर्ज की गई है, जो संगठित पर्यटन की दिशा में बड़ा कदम है।

राज्य में 350 करोड़ रुपए की लागत से फिल्म सिटी और कन्वेंशन सेंटर विकसित किया जा रहा है, जिससे छत्तीसगढ़ को इवेंट और फिल्म हब के रूप में स्थापित किया जाएगा। वहीं, भोरमदेव कॉरिडोर परियोजना के तहत 145 करोड़ रुपए से विरासत पर्यटन को नया स्वरूप दिया जा रहा है।

मायाली बगीचा सर्किट के जरिए जनजातीय क्षेत्रों में पर्यटन विकास की नींव रखी गई है। आज छत्तीसगढ़ की मौजूदगी स्पेन, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों तक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मंचों पर दर्ज हो रही है। पर्यटन गाइड प्रशिक्षण कार्यक्रमों से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं।

डॉ. यादव ने बताया कि छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के मुनाफे में पांच गुना वृद्धि हुई है। विभाग ने 2 करोड़ से बढ़कर 10 करोड़ रुपए तक की ऐतिहासिक छलांग लगाई है। पर्यटन नीति 2026 के तहत इको, एथनिक और आध्यात्मिक पर्यटन के लिए ठोस रोडमैप तैयार किया जा रहा है। 17 पर्यटन संपत्तियों की आउटसोर्सिंग से करीब 200 करोड़ रुपए का निवेश और 100 से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

चित्रकोट टेंट सिटी और लैंड बैंक मॉडल न सिर्फ पर्यटकों को नए अनुभव दे रहे हैं, बल्कि निवेश के नए द्वार भी खोल रहे हैं। विजन 2028 के तहत छत्तीसगढ़ को भारत का अग्रणी इको-एथनिक ग्लोबल डेस्टिनेशन बनाने का लक्ष्य तय किया गया है।

IHM रायपुर की उपलब्धियां
इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (IHM), रायपुर के छात्रों ने आईएचएम हैदराबाद में आयोजित नेशनल बडिंग शेफ प्रतियोगिता में लगातार तीसरे वर्ष प्रथम स्थान प्राप्त किया। एवरेस्ट बैटर किचन कलिनरी एवं बेकरी चैलेंज में भी संस्थान ने प्रथम और द्वितीय पुरस्कार हासिल किए।

एकता नगर, गुजरात में आयोजित भारत पर्व के दौरान छात्रों ने छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के सहयोग से लाइव स्टूडियो किचन में पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का प्रदर्शन किया। इसके अलावा गुजरात-छत्तीसगढ़ सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम और फूड फेस्टिवल में आईएचएम गांधीनगर के साथ मिलकर राज्य की संस्कृति और खानपान को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

आईएचएम रायपुर, छत्तीसगढ़ शासन के पर्यटन विभाग के अधीन संचालित संस्थान है, जहां तीन वर्षीय बीएससी डिग्री और तीन डिप्लोमा कोर्स संचालित किए जाते हैं। बीएससी पाठ्यक्रम की डिग्री जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली द्वारा प्रदान की जाती है।

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