भाटापारा- 8200 से 8400 रुपए क्विंटल। विष्णुभोग में बोली गई यह कीमत आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है क्योंकि चावल में अंतरप्रांतीय मांग का दबाव बना हुआ है।
खुश है विष्णुभोग की फसल लेने वाले किसान। हैरत में हैं चावल बनाने वाली ईकाइयां प्रतिस्पर्धी खरीदी का माहौल देखकर। आ रही तेजी के बावजूद बारीक चावल उपभोक्ता खरीदी में न केवल निरंतरता बनाए हुए हैं बल्कि मासिक खरीदी में मात्रा भी बढ़ा रहे हैं।

घट रहा रकबा, बढ़ रही मांग
बारीक धान की बोनी का रकबा अब अपने छत्तीसगढ़ में तेजी से कम हो रहा है जबकि बारीक चावल बनाने वाली इकाइयों की मांग के साथ उपभोक्ता मांग भी दोगुनी के करीब पहुंच चुकी है। मांग और आपूर्ति के बीच गहरा अंतर साल-दर- साल बढ़ रहा है। इसलिए विष्णुभोग धान में कीमत हर साल बढ़त की राह पर है।
सिमट रही व्यावसायिक खेती
कोरबा जिला का विष्णुभोग, धान के लिए विशेष पहचान रखता है। लेकिन अब यहां सिर्फ रतनपुर और कटघोरा के साथ पाली जैसे क्षेत्र के किसान ही ले रहे हैं, विष्णुभोग की फसल। अंबिकापुर, मुंगेली, बेमेतरा और कवर्धा जिले में बारीक धान की प्रजाति फैलाव ली हुई है। इस तरह छत्तीसगढ़ के इन पांच जिलों से ही विष्णुभोग धान की आपूर्ति हो रही है।
चावल के लिए यह सबसे आगे
महाराष्ट्र। पोहा के बाद विष्णुभोग चावल की मांग करने वाला सबसे बड़ा उपभोक्ता यह राज्य आगत शादी-ब्याह और त्योहारों के लिए अग्रिम सौदे कर रहा है चावल में। इससे कमजोर आपूर्ति के बीच विष्णुभोग की कीमत बढ़ी हुई है। मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ता यह अंतर संकेत दे रहा है और तेजी का। धारणा 9000 रुपए क्विंटल की बनती नजर आ रही है।
