वॉशिंगटन। दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप WhatsApp की प्राइवेसी और इसके ‘एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन’ के दावों पर अब कानूनी संकट मंडरा रहा है। अमेरिका में मेटा (Meta) के खिलाफ एक बड़ा मुकदमा दर्ज किया गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि कंपनी यूजर्स को मैसेज की गोपनीयता को लेकर गुमराह कर रही है। शिकायत के अनुसार, WhatsApp मैसेज पूरी तरह निजी नहीं हैं और कंपनी के पास उन्हें स्टोर करने और एक्सेस करने की तकनीकी क्षमता मौजूद है।
इस मुकदमे में कुछ अज्ञात ‘व्हिसल ब्लोअर्स’ के हवाले से दावा किया गया है कि WhatsApp के कर्मचारी यूजर्स के संवाद तक पहुंच सकते हैं। हैरानी की बात यह है कि इस कानूनी लड़ाई में भारत, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील और मेक्सिको जैसे देशों के यूजर्स को भी शामिल बताया गया है। इन आरोपों ने दुनियाभर के करोड़ों यूजर्स के बीच चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि WhatsApp हमेशा से ही खुद को एक सुरक्षित प्लेटफॉर्म बताता रहा है।
दूसरी ओर, मेटा ने इन सभी आरोपों को ‘बेबुनियाद और कल्पना’ करार दिया है। मेटा के प्रवक्ता एंडी स्टोन ने स्पष्ट किया कि कंपनी पिछले 10 वर्षों से ‘सिग्नल प्रोटोकॉल’ पर आधारित एन्क्रिप्शन का उपयोग कर रही है और वह इस मुकदमे का अदालत में आक्रामक तरीके से सामना करेगी। कंपनी का कहना है कि उनकी सुरक्षा प्रणाली में कोई सेंध नहीं है और प्राइवेसी से कोई समझौता नहीं किया गया है।