रायपुर साहित्य उत्सव : दूसरे दिन विचार, विमर्श और संस्कृति का संगम

रायपुर। राजधानी रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन परिसर में आयोजित तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव के दूसरे दिन शनिवार को साहित्य, संस्कृति, सिनेमा, मीडिया और भारतीय ज्ञान परंपरा पर केंद्रित गहन विचार–विमर्श हुआ। विभिन्न मंडपों में एक साथ चल रहे सत्रों में देश–प्रदेश के प्रख्यात साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों, पत्रकारों और कलाकारों ने सहभागिता की।

दूसरे दिन का शुभारंभ विनोद कुमार शुक्ल मंडप में “राष्ट्र सेवा के सौ वर्ष” विषय पर संवाद से हुआ, वहीं लाला जगदलपुरी मंडप में छत्तीसगढ़ के लोक गीतों पर परिचर्चा आयोजित की गई। लोक संस्कृति और परंपरा की समृद्ध विरासत पर वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए।

द्वितीय सत्र में विनोद कुमार शुक्ल मंडप में भारत का बौद्धिक विमर्श विषय पर संवाद हुआ, जिसमें राम माधव और कृष्ण दास शामिल हुए, जबकि श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में एकात्म मानवदर्शन: समाज परिवर्तन का सूत्रधार पर परिचर्चा हुई। सत्रों में समाज पर मीडिया और सिनेमा के प्रभाव पर विस्तृत चर्चा की गई।

तृतीय सत्र में विनोद कुमार शुक्ल मंडप में नीतीश भारद्वाज के साथ धार्मिक फिल्में और टेली धारावाहिकों का दौरा, लाला जगदलपुरी मंडप में राष्ट्रीय मीडिया में बहस के मुद्दे, श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में नई पीढ़ी की फिल्मी दुनिया और अनिरुद्ध नीरव मंडप में साहित्य: उपनिषद से एआई तक विषय पर परिचर्चाएं हुईं। यह सत्र युवाओं और शोधार्थियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

चतुर्थ सत्र में विनोद कुमार शुक्ल मंडप में भारतीय ज्ञान परंपरा, लाला जगदलपुरी मंडप में डिजिटल युग के लेखक और पाठक तथा श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में साहित्य के झरोखे से इतिहास तथा अनिरुद्ध नीरव मंडप में बाल साहित्य की प्रासंगिकता पर संवाद हुआ। वक्ताओं ने परंपरा और आधुनिकता के समन्वय पर बल दिया।

इसके बाद आयोजित पंचम सत्र में विनोद कुमार शुक्ल मंडप में माओवादी आतंक और लोकतंत्र, लाला जगदलपुरी मंडप में डॉ. अंबेडकर – विचारपुंज की आभा, श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में शैक्षणिक संस्थानों में भाषा और साहित्य का स्तर विषय पर विचार रखे गए।

सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत विनोद कुमार शुक्ल मंडप में स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी की स्मृति में काव्य पाठ का आयोजन हुआ, जिसने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

उत्सव परिसर में राष्ट्रीय पुस्तक मेला, फूड जोन, ओपन टैलेंट मंच और पेंटिंग कार्यशाला में भी दिनभर चहल-पहल बनी रही। साहित्य प्रेमियों की भारी उपस्थिति ने रायपुर साहित्य उत्सव के दूसरे दिन को यादगार बना दिया।

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